लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर एक बार फिर कयासबाज़ी तेज़। दैनिक भारतवर्ष की ख़ास ग्राउंड रिपोर्ट।
न्यूज़ डेस्क : पटना
बिहार की सियासत में ‘अलग राह’ चुनने के लिए मशहूर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजप्रताप यादव की वर्तमान राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं एक बार फिर गर्म हैं। अपनी बेबाक शैली, धार्मिक यात्राओं और सामाजिक-राजनीतिक प्रयोगों के लिए चर्चा में रहने वाले तेजप्रताप की मौजूदा स्थिति को राजनीतिक विश्लेषक एक ‘शांत लेकिन नए बड़े दांव’ की तैयारी के रूप में देख रहे हैं।
हालिया दिनों में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मुख्य कार्यक्रमों और बैठकों में उनकी सीमित उपस्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे पार्टी के भीतर खुद को नए सिरे से स्थापित करना चाहते हैं या अपनी एक अलग सियासी ज़मीन तैयार कर रहे हैं।

मुख्य बिंदु: क्या है ज़मीनी हकीकत?
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‘छात्र जनशक्ति परिषद’ पर बढ़ा ध्यान:
तेजप्रताप यादव पिछले कुछ समय से अपने संगठन ‘छात्र जनशक्ति परिषद’ के बैनर तले युवाओं और ज़मीनी कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं। आरजेडी के मुख्य संगठन से इतर इस मंच को सक्रिय रखना उनके उस रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जिससे वे अपनी स्वतंत्र फैन-फॉलोइंग बनाए रख सकें।
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पार्टी कार्यक्रमों से दूरी या रणनीतिक चुप्पी?
तेजस्वी यादव द्वारा पार्टी की कमान पूरी तरह से संभाले जाने के बाद तेजप्रताप की भूमिका मुख्यधारा की राजनीति में थोड़ी कम दिखाई दे रही है। हालांकि, वे सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि तेजस्वी उनके “अर्जुन” हैं और वे खुद “कृष्ण” की भूमिका में हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर दोनों भाइयों के समर्थकों के बीच खींचतान किसी से छिपी नहीं है।
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धार्मिक और सामाजिक यात्राएं:
राजनीतिक सरगर्मियों के बीच तेजप्रताप लगातार धार्मिक स्थलों की यात्राओं, जनता दरबार और सामाजिक अभियानों के ज़रिए मीडिया और आम लोगों के बीच चर्चा में बने रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उनकी जन-संपर्क बनाए रखने की अपनी अनूठी शैली है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
बिहार राजनीति के जानकारों का मानना है कि तेजप्रताप यादव को हल्के में लेना राजनीतिक भूल होगी। दैनिक भारतवर्ष से बातचीत में एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने बताया:
“तेजप्रताप यादव की राजनीतिक शैली पारंपरिक राजनेताओं जैसी नहीं है। वे अपनी अलग पहचान और सीधे जनता से जुड़ने के अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं। आरजेडी के भीतर भले ही पावर सेंटर तेजस्वी यादव हों, लेकिन तेजप्रताप के पास अपना एक वफादार वोट बैंक और युवाओं का वर्ग है जो उनकी किसी भी नई पहल का समर्थन कर सकता है।”
भविष्य का क्या होगा रुख?
बिहार में आगामी राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए तेजप्रताप यादव का हर कदम मायने रखता है।
क्या वे आरजेडी में अपनी समानांतर जगह बनाए रखेंगे या आने वाले समय में अपने नए संगठन के ज़रिए बिहार की राजनीति में कोई नया कोण तैयार करेंगे?
फिलहाल, तेजप्रताप की शांति और उनके द्वारा ज़मीनी स्तर पर की जा रही छोटी-छोटी बैठकें इशारा कर रही हैं कि वे बिहार की सियासत में किसी बड़े मौके के इंतज़ार में हैं।
हालांकि तेज प्रताप यादव अभी जेल से नहीं छूटे हैं। उन्हें नीट विरोध प्रदर्शन और हिंसा के मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बेऊर जेल भेजा गया है। उनकी जमानत याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
गिरफ्तारी और मामला
- गिरफ्तारी की वजह: नीट (NEET) परीक्षा धांधली के विरोध और ‘बिहार बंद’ के समर्थन के दौरान हुई हिंसा।
- दर्ज धाराएं: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) (हत्या का प्रयास), दंगा भड़काने और सरकारी काम में बाधा डालने के गंभीर आरोप।
- वर्तमान स्थिति: अदालत में सुनवाई के बाद उनका फैसला सुरक्षित है और वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
(दैनिक भारतवर्ष की विशेष रिपोर्ट)



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