झारखंड में 14वीं JPSC और JSSC-CGL परीक्षा में धांधली के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज। रांची में बेमियादी अनशन के बीच CID की 18 ठिकानों पर छापेमारी और BJP का सरकार पर सीधा हमला। पढ़ें ज़मीनी रिपोर्ट।
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष
झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों केवल मानसूनी बादलों की गड़गड़ाहट से नहीं, बल्कि हज़ारों युवाओं के आक्रोशित नारों से गूंज रही है। 14वीं JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, OMR शीट में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन अब एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। रांची के बापू वाटिका और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे युवाओं के समर्थन में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की बेमियादी भूख हड़ताल और इस मुद्दे पर सत्ता-विपक्ष के आमने-सामने आने से राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है।
बापू वाटिका से उठी आग: CBI जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा है। बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद सैकड़ों की संख्या में छात्र सड़कों और अनशन स्थलों पर जमे हुए हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को तुरंत रद्द करना, संपूर्ण चयन प्रक्रिया की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराना और दोषी अधिकारियों व सिंडिकेट पर सख्त कार्रवाई शामिल है।
छात्रों का तर्क है कि बार-बार भर्ती परीक्षाओं में होने वाली अनियमिताओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है, इसलिए जब तक ठोस संवैधानिक समाधान नहीं निकलता, आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
CID का बड़ा एक्शन: राज्यभर के 18 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी
छात्रों के बढ़ते दबाव और राजनीतिक सरगर्मी के बीच राज्य जांच एजेंसी (CID) ने कार्रवाई तेज कर दी है। CID की टीमों ने रांची, पलामू, बोकारो, हजारीबाग और धनबाद समेत 18 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है।
जांच के दौरान पूर्व JPSC सदस्यों, संदिग्ध कोचिंग संचालकों और परीक्षा से जुड़े अधिकारियों के परिसरों को खंगाला गया। छापेमारी में लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, कई अभ्यर्थियों की OMR शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं। सरकार का दावा है कि जांच एजेंसी पूरी निष्पक्षता से गड़बड़ी की तह तक पहुँचने में जुटी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
राजनीतिक घमासान: BJP आक्रामक, हेमंत सरकार बैकफुट पर?
इस प्रशासनिक और जन-आंदोलन ने राजनीतिक मोर्चे पर भी तीखी जंग छेड़ दी है। भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार परीक्षा माफियाओं को संरक्षण दे रही है और केवल निचले स्तर पर कार्रवाई करके बड़े चेहरों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष ने मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे और मामले की CBI जांच की मांग उठाई है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि सरकार छात्रों की चिंताओं के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। CID की त्वरित और व्यापक छापेमारी इस बात का प्रमाण है कि वर्तमान सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है।
निष्कर्ष और ज़मीनी हकीकत
झारखंड का यह युवा आंदोलन अब प्रशासनिक सुधार की मांग से आगे बढ़कर राज्य की राजनीति का केंद्रीय बिंदु बन चुका है। एक तरफ जहां CID की कार्यप्रणाली पर सबकी नजरें टिकी हैं, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर डटे छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि पारदर्शी और ठोस व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और प्रशासन इस गतिरोध को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


