[दैनिक भारतवर्ष की विशेष रिपोर्ट]
न्यूज़ डेस्क : पटना/नई दिल्ली
नई दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों से शुरू हुए सीजेपी (CJP) और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शन की आंच अब बिहार की राजनीति और सड़कों पर पूरी तरह सुलग उठी है। नीट पेपर लीक मामले, दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर बुलाया गया ‘बिहार बंद’ राज्य के कई जिलों में हिंसक झड़पों में बदल गया। राजधानी पटना से लेकर सीवान तक वर्तमान में हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बने हुए हैं।

प्रमुख बिंदु: कहाँ-कहाँ दिखा सबसे ज्यादा असर?
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पटना का जेपी गोलंबर और गांधी मैदान बना अखाड़ा: आंदोलन के समर्थन में उतरे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं की जब पुलिस से भिड़ंत हुई, तो स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज करना पड़ा। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मियों और छात्रों को चोटें भी आईं।
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सीवान में फायरिंग और हिंसक झड़प: बिहार बंद के दौरान सीवान जिले में स्थिति तब बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। हालात को संभालने के लिए पुलिस को गोलीबारी करनी पड़ी, जिसमें कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना है।
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छपरा, औरंगाबाद और दरभंगा में उबाल: राजधानी के अलावा राज्य के अन्य प्रमुख जिलों में भी छिटपुट तोड़फोड़, आगजनी और सड़क जाम जैसी घटनाएं दर्ज की गईं।

तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी से गरमाई सियासत
इस पूरे घटनाक्रम के बीच बिहार की घरेलू राजनीति में भूचाल आ गया है। जनशक्ति जनता दल (JJD) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को छात्रों के आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल होने और प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हिंसा भड़काने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार देर रात उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर सेंट्रल जेल भेज दिया गया है।
पार्टी और समर्थकों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह “राजनीतिक बदले की भावना” और तानाशाही करार दिया है, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त एक्शन लिया गया है।
प्रशासन और सरकार का रुख
राज्य के गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि आम जनजीवन को बाधित करने और उपद्रव फैलाने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों (पैरामिलिट्री और बिहार पुलिस) की तैनाती कर दी गई है। खुफिया एजेंसियां भी सोशल मीडिया पर भ्रामक या पुरानी वीडियो क्लिप्स शेयर करने वालों पर पैनी नजर रख रही हैं, ताकि किसी भी अफवाह से राज्य का माहौल न बिगड़े।
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