कांग्रेस कार्यसमिति के केवल पहले दो अंतरे गाने के फैसले पर भाजपा का पलटवार, नितिन नवीन बोले—राष्ट्रीय गीत के सम्मान से कोई समझौता नहीं | देखें वीडियो!
न्यूज़ डेस्क : दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
वंदे मातरम् को लेकर फिर गरमाई देश की सियासत
नई दिल्ली: देश की राजनीति में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की ओर से पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने के पुराने निर्णय को दोहराए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार, 22 अगस्त को इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। भाजपा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान, उसकी ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय महत्व से किसी भी राजनीतिक सुविधा के लिए समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भाजपा का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों से इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार तेज हो रहे हैं।
कांग्रेस के फैसले पर BJP की कड़ी आपत्ति
कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त 2026 को अपने 1937 के प्रस्ताव के अनुरूप पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ के पहले दो अंतरे गाने की नीति पर कायम रहने का निर्णय लिया था। कांग्रेस की ओर से इस फैसले को उसके ऐतिहासिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।
भाजपा ने कांग्रेस के इस निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, भाजपा ने आज पारित प्रस्ताव में कांग्रेस के इस फैसले की कड़ी निंदा की और ‘वंदे मातरम्’ की पूरी ऐतिहासिक विरासत के सम्मान की बात कही।
भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा के प्रस्ताव में कहा गया है कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी विरासत को राजनीतिक सुविधा, कथित तुष्टिकरण या वोट बैंक की राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि वह ‘वंदे मातरम्’ की विरासत को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए अभियान चलाएगी।
भाजपा की ओर से इस मुद्दे को केवल पार्टी राजनीति तक सीमित न रखते हुए राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर पेश किया जा रहा है।
कांग्रेस का रुख क्या है?
दूसरी ओर, कांग्रेस अपने निर्णय को 1937 में लिए गए पार्टी के ऐतिहासिक फैसले से जोड़ रही है। कांग्रेस का कहना है कि पार्टी कार्यक्रमों में पहले दो अंतरे गाने की व्यवस्था कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि उसके पुराने निर्णय के अनुरूप है। इस पूरे विवाद में कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक मुद्दे को तूल देने का आरोप भी लगाया है।
इस तरह दोनों प्रमुख राष्ट्रीय दल इस मुद्दे को अलग-अलग राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं।
संसद के फैसले और राष्ट्रीय गीत की स्थिति भी चर्चा में
इस विवाद के बीच ‘वंदे मातरम्’ की राष्ट्रीय स्थिति को लेकर भी बहस तेज हुई है। भाजपा के प्रस्ताव में संसद से जुड़े हालिया कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा गया है कि 1937 का राजनीतिक समझौता बाद के संवैधानिक और कानूनी निर्णयों पर हावी नहीं हो सकता।
यही मुद्दा अब BJP-कांग्रेस की राजनीतिक बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
अमित शाह भी कांग्रेस पर साध चुके हैं निशाना
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कांग्रेस के दो अंतरे गाने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने कांग्रेस के फैसले को लेकर तीखी राजनीतिक टिप्पणी की और इसे तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा।
भाजपा नेताओं की लगातार टिप्पणियों के बाद अब पार्टी द्वारा औपचारिक प्रस्ताव पारित किए जाने से यह विवाद और राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है।
देखिये इस मामले पर अखिलेश यादव ने क्या कहा ?
आगे क्या?
भाजपा ने संकेत दिया है कि वह ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक विरासत और सम्मान को लेकर देशभर में अभियान चलाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल ‘वंदे मातरम्’ का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है और दोनों दल अपने-अपने पक्ष को जनता के सामने रखने की तैयारी में हैं।
















