सासाराम सदर अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत से हंगामा, अमित पासवान ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
प्रसव के दौरान आशा देवी और नवजात की मौत के बाद परिजनों का आक्रोश, डॉक्टर की मौजूदगी और कथित लापरवाही को लेकर उठे सवाल; डीएम से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
सासाराम: सासाराम सदर अस्पताल के मातृ-शिशु अस्पताल में प्रसव के दौरान गर्भवती महिला और उसके नवजात बच्चे की मौत के बाद रविवार को अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतका की पहचान चेनारी विधानसभा क्षेत्र के छोटकी चेनारी निवासी आशा देवी के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों ने अस्पतालकर्मियों पर कथित लापरवाही और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के समय अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे।
घटना की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तथा आक्रोशित लोगों को समझाकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया। इसी बीच भीम आर्मी रोहतास के वरिष्ठ नेता एवं चेनारी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अमित पासवान ने भी मामले को लेकर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर रोहतास की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रसव के लिए सदर अस्पताल पहुंची थीं आशा देवी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आशा देवी को प्रसव के लिए सासाराम सदर अस्पताल के मातृ-शिशु अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि रविवार अहले सुबह प्रसव के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।
मृतका की शादी करगहर थाना क्षेत्र के कुसही गांव निवासी नीतीश पासवान से हुई थी। घटना की जानकारी मिलते ही ससुराल और मायके पक्ष के लोग बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। मौत की खबर से परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू हो गया।
परिजनों ने डॉक्टर की गैरमौजूदगी का लगाया आरोप
मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया कि देर रात प्रसव के दौरान अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और दो-तीन नर्सों के भरोसे ही प्रसव कराया जा रहा था। परिजनों का दावा है कि महिला की स्थिति बिगड़ने के बावजूद समय पर समुचित चिकित्सकीय सहायता नहीं मिली।
हालांकि, डॉक्टर की अनुपस्थिति और इलाज में लापरवाही से मौत होने संबंधी इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। महिला और नवजात की मौत के वास्तविक कारण तथा उपचार के दौरान अपनाई गई चिकित्सकीय प्रक्रिया जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

हंगामे के बाद अस्पताल में बढ़ा तनाव
जच्चा-बच्चा की मौत के बाद अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आक्रोशित परिजन और उनके साथ पहुंचे लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
हंगामे के दौरान अस्पताल में मौजूद कुछ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के वहां से चले जाने की बात भी सामने आई है। सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने लोगों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।
अमित पासवान ने कहा- सिर्फ इमारतें बड़ी करने से स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर नहीं होगी
मामले को लेकर भीम आर्मी रोहतास के वरिष्ठ नेता एवं चेनारी विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अमित पासवान ने 30 अगस्त 2026 को प्रेस विज्ञप्ति जारी की। उन्होंने घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए रोहतास की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
अमित पासवान के मुताबिक, आशा देवी के परिजनों से घटना की जानकारी मिलने के बाद वह तत्काल सदर अस्पताल पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था को केवल चमकदार और ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि जिम्मेदार डॉक्टरों, संवेदनशील अस्पतालकर्मियों और जवाबदेह व्यवस्था से बेहतर बनाया जा सकता है।

डीएम से की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
अमित पासवान ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर रोहतास जिलाधिकारी से बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध निष्पक्ष एवं न्यायोचित कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने मौके पर मौजूद सासाराम एसडीएम से भी उचित कार्रवाई का आग्रह किए जाने की बात कही।
अमित पासवान ने कहा कि गरीब और आम लोगों के लिए सरकारी अस्पताल जीवन की बड़ी उम्मीद हैं। ऐसे में यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
कृष्ण कुमार आनंद समेत अन्य लोग भी रहे मौजूद
अमित पासवान के अनुसार, उनके साथ आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रदेश सचिव कृष्ण कुमार आनंद और लड्डू भी मौके पर मौजूद रहे। सभी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली।
जांच से स्पष्ट होगी जिम्मेदारी
इस घटना में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रसव के दौरान महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई। परिजनों और अमित पासवान की ओर से अस्पतालकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
मामले में अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से क्या तथ्य सामने आते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच में किसी स्तर पर चिकित्सकीय लापरवाही या ड्यूटी में कोताही सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
दैनिक भारतवर्ष इस मामले में सभी पक्षों के आधिकारिक तथ्यों और जांच के निष्कर्ष को प्राथमिकता देगा। हमारा उद्देश्य आरोपों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि घटना की पूरी और निष्पक्ष तस्वीर पाठकों तक पहुंचाना है।
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