ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ ने नेपाल में मचाई भारी तबाही, सैकड़ों लोग लापता; झील का पानी बढ़ने से बचाव अभियान पर भी संकट
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे हिमालयी क्षेत्र को दहला दिया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के एक हिस्से के टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ के पानी और मलबे ने सड़कें, पुल, मकान तथा अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में मृतकों की संख्या 469 पहुंच गई है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी मौतें दर्ज की गई हैं और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं।
ग्लेशियर टूटने से शुरू हुई तबाही
रिपोर्टों के अनुसार 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर का हिस्सा टूटने और बर्फ-मलबे के नदी तंत्र में पहुंचने के बाद अचानक तेज जलप्रवाह पैदा हुआ। देखते ही देखते पानी, चट्टानों और मलबे की शक्तिशाली धारा नीचे की ओर बहने लगी। इसका सबसे ज्यादा असर नेपाल के रासुवा और आसपास के क्षेत्रों तथा चीन के तिब्बत क्षेत्र में दिखाई दिया।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने भी 27 अगस्त के अपने अपडेट में भोटे कोशी नदी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड से बड़े पैमाने पर जनहानि, विस्थापन और मकान, सड़क, पुल तथा जलविद्युत ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि की थी।

469 मौतें, अब भी बड़ी संख्या में लोग लापता
आपदा के बाद राहत और बचाव दल लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं। लेकिन कई इलाकों में सड़क और पुल बह जाने तथा दुर्गम पहाड़ी भूभाग के कारण राहत अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 469 हो चुकी है और नेपाल-चीन सीमा के दोनों ओर 1,000 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल सरकार के शुरुआती आधिकारिक अपडेट में 33 देशों के 596 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी। बाद के अपडेट में आंकड़े बढ़े हैं, जिससे आपदा के वास्तविक पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।
देखें वीडियो:
मलबे से बनी झील ने बढ़ाई नई चिंता
सबसे चिंताजनक स्थिति अब उस जगह पैदा हुई है जहां भूस्खलन और मलबे के कारण एक बैरियर झील बन गई है। शुक्रवार को इस झील का पानी बढ़कर बाहर निकलने लगा, जिसके बाद आगे और बाढ़ आने की आशंका पैदा हो गई। इसके चलते कुछ क्षेत्रों में चल रहा बचाव अभियान प्रभावित हुआ और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई शुरू करनी पड़ी।
रिपोर्टों के मुताबिक झील में पानी की मात्रा लगभग 25 लाख घन मीटर तक पहुंच चुकी है। यदि इसका प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है तो नीचे के इलाकों में दोबारा तेज बाढ़ आने का खतरा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ ने नेपाल और चीन के बीच कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचाया है। सड़कें और पुल टूटने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। नेपाल और चीन की टीमें हवाई सर्वेक्षण, ड्रोन और अन्य तकनीकों की मदद से स्थिति का आकलन कर रही हैं। लगातार बढ़ते पानी और अस्थिर पहाड़ी भूभाग के कारण बचाव दलों के लिए जोखिम भी बना हुआ है।
देखें वीडियो:
भारतीय नागरिकों की भी बढ़ी चिंता
इस त्रासदी में कई भारतीय नागरिकों के भी संपर्क से बाहर होने की खबरें सामने आई हैं। 28 अगस्त की रिपोर्टों में करीब 290 भारतीयों के अब तक संपर्क में नहीं आने की जानकारी दी गई थी। भारत सरकार और संबंधित राज्य प्रशासन प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने और नेपाल में मौजूद भारतीयों को सुरक्षित निकालने के प्रयास कर रहे हैं।
भारत ने नेपाल को राहत सामग्री भी भेजी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार दो विमानों के जरिए 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई गई है और प्रभावित भारतीयों को निकालने के प्रयास जारी हैं।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती आपदा का खतरा
इस आपदा ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के बढ़ते खतरे पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालय में तेजी से बदलती जलवायु और बढ़ता तापमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ और ग्लेशियरों की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इस विशेष घटना के कारणों और जलवायु परिवर्तन के बीच सीधा संबंध स्थापित करने के लिए अभी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन बैरियर झील के उफनने से पैदा हुआ नया खतरा प्रशासन और बचाव एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

















