विशेष सत्र की अटकलों के बीच कांग्रेस ने सरकार से मांगी परिसीमन प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक, राज्यों को पर्याप्त समय देने की भी अपील
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
नई दिल्ली: लोकसभा परिसीमन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार, 27 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव को संसद में लाने से पहले राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को उसका अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
खरगे का यह पत्र संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने संसद की एक और बैठक बुलाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया। रिजिजू ने कहा कि यदि संसद का सत्र औपचारिक रूप से स्थगित नहीं किया गया है, तो सरकार जरूरत पड़ने पर सदनों को फिर से बुला सकती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार वास्तव में विशेष सत्र बुलाने जा रही है या नहीं।
543 लोकसभा सीटें 25 साल तक बनाए रखने की मांग
कांग्रेस ने परिसीमन के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए तीन प्रमुख मांगें सामने रखी हैं। पार्टी चाहती है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या अगले 25 वर्षों तक बरकरार रखी जाए। इसके साथ ही राज्यों के बीच मौजूदा सीटों के आवंटन को भी 25 वर्षों तक बनाए रखने की मांग की गई है। कांग्रेस ने 2029 के लोकसभा चुनाव से महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की मांग भी दोहराई है।
आखिर क्यों महत्वपूर्ण है परिसीमन का मुद्दा?
परिसीमन का अर्थ चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं और उनके प्रतिनिधित्व का पुनर्निर्धारण है। मौजूदा राजनीतिक विवाद का एक बड़ा कारण यह है कि जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण से अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव आ सकता है।
दक्षिण भारत के कई राज्यों की ओर से यह चिंता जताई गई है कि जिन राज्यों ने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को अपनाया है, उन्हें भविष्य में सीटों के पुनर्वितरण में राजनीतिक नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को भी सीटों में वृद्धि का लाभ मिल सकता है। अप्रैल में सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 543 मौजूदा सीटों को बढ़ाकर 816 किए जाने की स्थिति में दक्षिणी राज्यों की सीटें भी बढ़ने का अनुमान बताया गया था।
विशेष सत्र को लेकर बढ़ी राजनीतिक दिलचस्पी
संसद के मानसून सत्र के बाद परिसीमन को लेकर विशेष सत्र या संसद की दोबारा बैठक की अटकलों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। रिजिजू ने विशेष सत्र की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उनके बयान से इतना स्पष्ट है कि संसद की अगली बैठक की संभावना पूरी तरह खारिज नहीं की गई है। इसी वजह से विपक्ष सरकार से परिसीमन प्रस्ताव को लेकर पहले ही स्पष्टता और चर्चा की मांग कर रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच आगे क्या?
फिलहाल सरकार की ओर से परिसीमन पर किसी नए प्रस्ताव या विशेष सत्र की अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि संसद की अगली बैठक में परिसीमन से संबंधित कोई विधेयक निश्चित रूप से पेश किया जाएगा।
हालांकि, खरगे के ताजा पत्र और सरकार की ओर से संसद की संभावित अगली बैठक को लेकर दिए गए बयान से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि परिसीमन आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति के सबसे बड़े मुद्दों में से एक बना रह सकता है।
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