रक्षाबंधन पर शुरू हुई अभया ब्रिगेड की नई पहल, स्कूटी-बाइक से महिला पुलिसकर्मी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग और संवेदनशील इलाकों में करेंगी गश्त
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
पटना: बिहार में छात्राओं और महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘पुलिस दीदी’ यानी अभया ब्रिगेड को मैदान में उतारा गया है। रक्षाबंधन के अवसर पर शुरू की गई इस पहल के तहत महिला पुलिसकर्मियों को दोपहिया वाहन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे स्कूल-कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और महिलाओं की अधिक आवाजाही वाले संवेदनशील इलाकों में तेजी से गश्त कर सकें।

4,700 स्कूटर और मोटरसाइकिल से मजबूत होगी निगरानी
बिहार सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अगस्त को पटना के ज्ञान भवन में पुलिस दीदी (अभया ब्रिगेड) के लिए 4,700 दोपहिया वाहनों का लोकार्पण और फ्लैग ऑफ किया। सरकार के मुताबिक इन वाहनों का इस्तेमाल महिला पुलिसकर्मी छात्राओं की सुरक्षा और महिला सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए करेंगी।
इस पहल का उद्देश्य पुलिस की पहुंच को उन इलाकों तक तेज करना है, जहां बड़े पुलिस वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाते। दोपहिया वाहनों से महिला पुलिसकर्मियों के लिए स्कूल-कॉलेज और अन्य संवेदनशील स्थानों तक पहुंचना आसान होगा।

स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर पर विशेष नजर
‘पुलिस दीदी’ की गश्त केवल स्कूल-कॉलेज तक सीमित नहीं रहेगी। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, महिला पुलिसकर्मियों को ऐसे इलाकों में भी निगरानी के लिए लगाया जा रहा है, जहां महिलाओं और छात्राओं के साथ छेड़छाड़ या उत्पीड़न की शिकायतें सामने आती रही हैं।
गया में इस पहल के तहत संवेदनशील इलाकों, स्कूल-कॉलेज, कोचिंग सेंटर और महिलाओं की अधिक आवाजाही वाले स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों की विशेष गश्त शुरू की गई है। गया पुलिस के अनुसार, जिले को इस अभियान के लिए 70 स्कूटी मिली हैं।
छात्राओं को मिलेगा सीधे पुलिस से संपर्क का भरोसा
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य छात्राओं और महिलाओं के बीच पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाना भी है। महिला पुलिसकर्मी आसपास मौजूद रहेंगी तो किसी परेशानी की स्थिति में छात्राओं के लिए अपनी शिकायत या समस्या सीधे साझा करना आसान हो सकता है।
छेड़छाड़, फब्तियां कसने या महिलाओं को परेशान करने जैसी घटनाओं की सूचना मिलने पर पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर दोषी मानना उचित नहीं होगा; कार्रवाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
रक्षाबंधन पर सुरक्षा का संदेश
रक्षाबंधन के मौके पर शुरू की गई यह पहल प्रतीकात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है। सरकार ने इसे महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण से जोड़कर पेश किया है। बिहार सरकार का कहना है कि महिला सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है।

कई जिलों में शुरू हुआ अभियान
पुलिस दीदी अभियान का असर अब अलग-अलग जिलों में दिखाई देने लगा है। पूर्णिया में स्कूटी के माध्यम से स्कूल-कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर महिला पुलिसकर्मियों की निगरानी की व्यवस्था की गई है। वहीं सीतामढ़ी और बांका समेत अन्य जिलों में भी अभया ब्रिगेड की टीमों को दोपहिया वाहनों के साथ गश्त के लिए रवाना किया गया है।
दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष:
‘पुलिस दीदी’ की यह व्यवस्था छात्राओं और महिलाओं के लिए सुरक्षा का भरोसा बढ़ाने वाली पहल है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संवेदनशील इलाकों में गश्त कितनी नियमित रहती है, शिकायतों पर पुलिस कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और छात्राओं को पुलिस तक पहुंच कितनी सहज मिलती है।















