हिमालयी ग्लेशियर के धंसने से आई भयावह बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में मचाई तबाही, गांवों से लेकर सड़क और बिजली परियोजनाओं तक को भारी नुकसान
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
काठमांडू: नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल-चीन सीमा के पास हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के एक हिस्से के धंसने से तेज रफ्तार पानी, मलबे और चट्टानों का सैलाब निचले इलाकों की ओर बढ़ा, जिसकी चपेट में कई बस्तियां, सड़कें, पुल और बुनियादी ढांचे आ गए। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मृतकों की संख्या 165 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 1,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
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ग्लेशियर धंसने से अचानक आया भयावह सैलाब
रिपोर्टों के अनुसार नेपाल के रसुवा क्षेत्र और चीन के तिब्बत से लगे इलाकों में अचानक आई बाढ़ का प्रमुख कारण हिमालयी ग्लेशियर का धंसना बताया जा रहा है। ग्लेशियर से बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नदी घाटी में पहुंचा, जिसके बाद तेज बहाव ने आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती तौर पर घटना को लेकर भूकंप की आशंका जताई गई थी, लेकिन अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण सहित उपलब्ध आकलनों में ग्लेशियर धंसने और उससे बने मलबे के तेज बहाव को प्रमुख कारण बताया गया है।
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गांव, सड़क और पुल हुए तबाह
बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई इलाकों में मकान और बस्तियां पानी एवं मलबे में बह गईं। सड़क संपर्क बाधित होने के साथ कई पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। बिजली और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

भारतीय नागरिकों को लेकर भी बढ़ी चिंता
इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है। इनमें भारतीय नागरिक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु भी शामिल हैं। अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में लापता लोगों की संख्या में बदलाव सामने आया है, क्योंकि बचाव दल लगातार लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी में जुटे हैं। नेपाल सेना ने हेलीकॉप्टरों की मदद से प्रभावित क्षेत्र से लोगों को निकालने का अभियान चलाया है।
बिहार और उत्तर प्रदेश में भी बढ़ी सतर्कता
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी चिंता का कारण बना हुआ है। नेपाल से आने वाली नदियों के जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के कई सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ा दी गई है। गंडक और कोसी जैसी नदियों के जलस्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है तथा आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क किया गया है।
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राहत-बचाव अभियान जारी, भारत ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल में राहत और बचाव कार्य के लिए हजारों कर्मियों को लगाया गया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का प्रयास जारी है। भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी है, जिसमें टेंट, कंबल, स्वच्छता सामग्री, सोलर लैंप और दवाएं शामिल हैं।
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मौत और लापता लोगों का आंकड़ा लगातार बदल रहा
नेपाल की इस आपदा में मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। इसका कारण लगातार चल रहा खोज एवं बचाव अभियान और विभिन्न क्षेत्रों से आंकड़ों का अपडेट होना है। इसलिए आधिकारिक आंकड़ों के अंतिम रूप से सामने आने तक संख्या में बदलाव संभव है। फिलहाल उपलब्ध ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के आधार पर नेपाल-तिब्बत क्षेत्र में मृतकों की संख्या 165 के आसपास/उससे अधिक और लापता लोगों की संख्या 1,000 से अधिक बताई जा रही है।
यह आपदा हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़ और ग्लेशियर से जुड़ी प्राकृतिक घटनाओं के बढ़ते जोखिम को भी सामने लाती है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य के साथ-साथ आने वाले दिनों में नदी घाटियों और कमजोर इलाकों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होगी।
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