• HINDI NEWS
  • दिल्ली
  • 2029 में लोकसभा के साथ 22 राज्यों में चुनाव? NDA के प्लान से गरमाई सियासत
one-nation-one-election-2029-fi

2029 में लोकसभा के साथ 22 राज्यों में चुनाव? NDA के प्लान से गरमाई सियासत

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को 2034 से पहले लागू करने की चर्चा तेज, NDA शासित 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक साथ चुनाव कराने के विकल्प पर मंथन

न्यूज़ डेस्क : दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष

नई दिल्ली: देश की राजनीति में वंदे मातरम् विवाद से इतर अब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ उन 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है, जहां गठबंधन की सरकार या बहुमत है।

यह पहल यदि आगे बढ़ती है तो वर्तमान में प्रस्तावित समय-सीमा से काफी पहले देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। इस पर राजनीतिक और संवैधानिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है।

2034 की जगह 2029 का विकल्प क्यों चर्चा में?

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े मौजूदा विधायी प्रस्तावों के तहत चुनावों को चरणबद्ध तरीके से एक चुनाव चक्र में लाने की दिशा में काम किया जा रहा है और मौजूदा व्यवस्था में पहला पूर्ण समन्वित चुनाव चक्र 2034 में बनने की संभावना बताई गई है।

लेकिन अब NDA के भीतर 2029 में ही लोकसभा के साथ विधानसभा चुनावों को अधिक बड़े पैमाने पर समन्वित करने का विकल्प चर्चा में है। रिपोर्ट के अनुसार, NDA के 22 शासित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में से 11 में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव होने हैं

किन राज्यों में पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

रिपोर्ट के मुताबिक, NDA शासित जिन राज्यों में 2027 और 2028 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, उनमें छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मेघालय, राजस्थान और त्रिपुरा शामिल हैं।

वहीं हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र में 2029 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव पहले से ही होते रहे हैं।

यदि 2029 में चुनावी चक्र को एक साथ लाने का विकल्प अपनाया जाता है तो कुछ राज्यों की मौजूदा विधानसभा अवधि को सामान्य कार्यकाल पूरा होने से पहले समाप्त करना पड़ सकता है।

क्या मौजूदा सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं करेंगी?

यही इस प्रस्ताव का सबसे संवेदनशील राजनीतिक और संवैधानिक पहलू है।

रिपोर्टों के अनुसार, यदि योजना आगे बढ़ती है तो 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव कराने के लिए कुछ राज्यों की विधानसभाओं को उनके निर्धारित कार्यकाल से पहले भंग करना पड़ सकता है।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार ने सभी संबंधित राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग करने का फैसला कर लिया है। यह फिलहाल एक संभावित विकल्प है, जिस पर विचार किया जा रहा है।

संसद की संयुक्त समिति कर रही है विचार

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े विधेयकों की जांच के लिए संसद की संयुक्त समिति गठित की गई थी। समिति विभिन्न राज्यों की सरकारों, मुख्यमंत्रियों, विधायकों, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से चर्चा कर रही है।

समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 2029 में चुनाव कराने का सवाल समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और इस पर निर्णय NDA के मुख्यमंत्रियों को लेना होगा। समिति की रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के दौरान आने की उम्मीद है।

विपक्ष के लिए क्यों बढ़ सकती है चुनौती?

यदि 2029 में लोकसभा और बड़ी संख्या में विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की दिशा में कदम बढ़ता है, तो इसका असर देश की चुनावी रणनीति पर व्यापक हो सकता है।

एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय और राज्य स्तर के मुद्दे एक ही चुनावी अभियान में प्रमुखता पा सकते हैं। इससे राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति, उम्मीदवार चयन, संसाधन और प्रचार अभियान को एक बड़े चुनावी चक्र के हिसाब से तैयार करना पड़ेगा।

वहीं विपक्षी दलों की ओर से यह सवाल भी उठ सकता है कि क्या अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक मुद्दों और मतदाताओं के स्थानीय सवालों को राष्ट्रीय चुनाव के साथ जोड़ना उचित होगा।

सरकार के लिए भी आसान नहीं होगी राह

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लागू करना केवल राजनीतिक सहमति का विषय नहीं है। इसके लिए संवैधानिक और कानूनी बदलावों की भी आवश्यकता है।

वर्तमान प्रस्तावों की संसदीय जांच जारी है और अंतिम स्वरूप संसद की प्रक्रिया, राजनीतिक सहमति तथा आवश्यक संवैधानिक प्रावधानों पर निर्भर करेगा। इसलिए 2029 में 22 राज्यों के साथ चुनाव कराने की मौजूदा चर्चा को फिलहाल संभावित राजनीतिक रोडमैप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि घोषित चुनाव कार्यक्रम के रूप में।

2029 का चुनाव क्यों बन सकता है बड़ा राजनीतिक मोड़?

अगर यह विकल्प वास्तव में लागू होता है तो 2029 का लोकसभा चुनाव सिर्फ केंद्र की सरकार चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़ी संख्या में राज्यों की सत्ता का फैसला भी उसी चुनावी दौर में हो सकता है।

इससे भारत की चुनावी राजनीति का स्वरूप काफी बदल सकता है। हालांकि, अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि NDA के भीतर इस प्रस्ताव पर कितनी सहमति बनती है, विपक्षी दलों का रुख क्या रहता है और संसद में इससे जुड़े संवैधानिक बदलाव किस रूप में आगे बढ़ते हैं।

दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष

2029 में लोकसभा के साथ 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने का विचार फिलहाल चर्चा और संभावनाओं के स्तर पर है। इसे लेकर राजनीतिक हलचल जरूर तेज हो गई है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।

आने वाले महीनों में संसद की संयुक्त समिति की रिपोर्ट, NDA शासित राज्यों का रुख और केंद्र सरकार की रणनीति इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।

दैनिक भारतवर्ष — ‘व्यूज़ नहीं, न्यूज़ की बात’

शेयर करें :

यह भी पढ़ें

hanuman-ansh-movie-story-fi-

‘हनुमान अंश’ की कहानी क्या है? देखें वीडियो; नीम करौली बाबा के जीवन, आस्था और सेवा की यात्रा पर बनी फिल्म की पूरी केस स्टडी

मां के वियोग से आध्यात्मिक खोज तक, फिर मानव सेवा और आस्था के संदेश तक—जानिए ‘हनुमान अंश’ की…

india-global-diplomacy-modi-sco-summit-bishkek-2026-fi

SCO के मंच पर भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल? मोदी की मध्य एशिया यात्रा से वैश्विक समीकरणों पर नजर

उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त से SCO शिखर सम्मेलन में…

reservation-row-chirag-paswan-jitan-ram-manjhi-tejashwi-yadav-fi

आरक्षण पर NDA में बढ़ी रार, चिराग-मांझी आमने-सामने; तेजस्वी ने खोला सियासी मोर्चा

क्रीमी लेयर और ‘कोटे में कोटा’ की बहस से शुरू हुआ विवाद इस्तीफे की मांग तक पहुंचा, अब…

dainik_bharatvarsh_ad_1920x300

Scroll to Top