सासाराम सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिजली बाधित होने के बाद मोबाइल फोन की रोशनी में मरीज को यूरिनरी कैथेटर लगाया गया। बाद में जांच में कैथेटर सही जगह नहीं होने की बात सामने आई। रोहतास डीएम ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है।
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
सासाराम: बिहार के रोहतास जिले के सासाराम सदर अस्पताल में बिजली बाधित होने के दौरान मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से मरीज का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। घटना शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 की रात की बताई गई है। मामला सामने आने के बाद रोहतास के जिलाधिकारी दीपक कुमार मिश्रा ने जांच के आदेश दिए और एक जांच समिति गठित की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है।
पेशाब में परेशानी की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था मरीज
रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार रात एक व्यापारी को पेशाब करने में परेशानी की शिकायत के बाद सासाराम सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर की सलाह पर पैरामेडिकल स्टाफ ने मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की मदद से मरीज को यूरिनरी कैथेटर लगाया।
अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण इलाज के दौरान मोबाइल की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। घटना का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और बिजली के बैकअप सिस्टम को लेकर सवाल उठे।

मरीज ने कैथेटर ठीक नहीं लगे होने की शिकायत की
रिपोर्ट के मुताबिक, मरीज ने इलाज के दौरान बार-बार शिकायत की कि कैथेटर सही तरीके से नहीं लगाया गया है। हालांकि उसकी शिकायत पर तत्काल उचित ध्यान दिए जाने की बात सामने नहीं आई।
बाद में अल्ट्रासाउंड जांच के दौरान डॉक्टर ने पाया कि कैथेटर सही जगह पर नहीं था। इसके बाद कैथेटर को निकाल दिया गया। इस मामले में वास्तविक लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
MCB में तकनीकी खराबी से बिजली बाधित होने का दावा
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, बिजली आपूर्ति बाधित होने की वजह मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCB) में तकनीकी खराबी बताई गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इमरजेंसी वार्ड में इन्वर्टर बैकअप की व्यवस्था है, जबकि मॉडल अस्पताल के लिए अलग जनरेटर भी उपलब्ध है। अधिकारियों ने बताया कि बिजली बहाल होने में देरी इसलिए हुई क्योंकि समर्पित जनरेटर ऑपरेटर उस समय ड्यूटी पर नहीं था। इन दावों और बैकअप व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की जांच अब समिति करेगी।
डीएम ने गठित की जांच समिति
मामले को गंभीरता से लेते हुए रोहतास के डीएम दीपक कुमार मिश्रा ने जांच के आदेश दिए हैं। जांच समिति घटना की परिस्थितियों, बिजली बाधित होने के कारण, अस्पताल की बैकअप व्यवस्था और मरीज के उपचार के दौरान हुई कथित चूक की जांच करेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी कर्मचारी या अधिकारी को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी।
नए मॉडल अस्पताल की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
यह मामला सासाराम सदर अस्पताल परिसर में संचालित नए मॉडल अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों पर भी सवाल खड़े करता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मॉडल अस्पताल भवन का उद्घाटन अगस्त 2025 में हुआ था, जबकि इसका संचालन 10 जुलाई 2026 से शुरू हुआ। रिपोर्ट में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की कमी का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इन व्यवस्थागत कमियों और मौजूदा घटना के बीच सीधी जिम्मेदारी तय करना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
- स्थान: सासाराम सदर अस्पताल, रोहतास
- घटना: 7 अगस्त 2026 की रात
- स्थिति: बिजली बाधित होने के दौरान मोबाइल फ्लैशलाइट में मरीज का उपचार
- मरीज: पेशाब करने में परेशानी की शिकायत वाला व्यापारी
- इलाज: मोबाइल की रोशनी में यूरिनरी कैथेटर लगाया गया
- बाद में: अल्ट्रासाउंड में कैथेटर सही जगह नहीं होने की बात सामने आई और उसे निकाल दिया गया
- बिजली बाधित होने का कारण: अस्पताल अधिकारियों के अनुसार MCB में तकनीकी खराबी
- बैकअप: इमरजेंसी वार्ड में इन्वर्टर और मॉडल अस्पताल में अलग जनरेटर की व्यवस्था बताई गई
- प्रशासनिक कार्रवाई: डीएम ने जांच समिति गठित की
- आगे: जांच रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी और कार्रवाई तय होगी।
दैनिक भारतवर्ष की बात: सासाराम सदर अस्पताल में मोबाइल की रोशनी में मरीज का उपचार किए जाने की घटना ने अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। अब सबकी नजर जांच समिति की रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर है।















