100% टैरिफ की आशंका के बीच PM मोदी से JD वेंस की बात, जानें क्या हुआ
न्यूज़ डेस्क : दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
नई दिल्ली: भारत पर अमेरिका की ओर से 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने की आशंका के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने तथा कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध बातचीत के विवरण में 100 फीसदी टैरिफ को लेकर किसी सीधे फैसले या सहमति का उल्लेख नहीं किया गया है।
व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के बाद बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। बातचीत में व्यापार के साथ-साथ रक्षा, महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई।
यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर नए सिरे से दबाव बढ़ा है। अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर भारी शुल्क लगाने की संभावना वाले रूस प्रतिबंध विधेयक को पारित कर दिया है। इस कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों के आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रावधान है। भारत और चीन उन प्रमुख देशों में शामिल हैं जिन पर इसका असर पड़ सकता है।
अभी भारत पर 100 फीसदी टैरिफ लागू नहीं हुआ
यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। अमेरिकी सीनेट में विधेयक पारित होने का मतलब यह नहीं है कि भारत से आने वाले सामान पर तत्काल 100 फीसदी टैरिफ लग गया है।
रॉयटर्स के अनुसार, सीनेट ने रूस और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों वाले विधेयक को 86-11 के मत से मंजूरी दी है। प्रस्तावित व्यवस्था राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की शक्ति दे सकती है। लेकिन विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया से गुजरना होगा और उसके बाद ही कानून बनने की स्थिति पैदा होगी।
इसलिए फिलहाल भारत के लिए इसे 100 फीसदी टैरिफ की वास्तविक स्थिति नहीं, बल्कि गंभीर संभावित खतरे के तौर पर देखना अधिक सटीक है।
रूस से तेल खरीद बना हुआ है विवाद का केंद्र
अमेरिका की ओर से प्रस्तावित अतिरिक्त टैरिफ का मूल संबंध रूस से ऊर्जा खरीद से है। अमेरिकी नीति का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय को कम करना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना है।
भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। नई अमेरिकी पहल में रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदारों को निशाना बनाने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इसी वजह से भारत पर संभावित आर्थिक दबाव को लेकर नई दिल्ली में भी घटनाक्रम पर करीबी नजर रखी जा रही है।
मोदी-वेंस बातचीत में क्या-क्या हुआ?
सार्वजनिक रूप से सामने आए विवरण के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और उपराष्ट्रपति वेंस ने इन प्रमुख मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया—
- भारत-अमेरिका व्यापार और आर्थिक सहयोग
- रक्षा एवं सुरक्षा साझेदारी
- महत्वपूर्ण और उभरती तकनीक
- ऊर्जा सुरक्षा
- महत्वपूर्ण खनिजों तक पहुंच
- दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना
अमेरिकी उपराष्ट्रपति की ओर से हुई इस बातचीत को ऐसे समय में खास महत्व दिया जा रहा है जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेदों के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी लगातार आगे बढ़ रहा है।
क्या 100% टैरिफ पर मोदी और वेंस के बीच बात हुई?
यह इस बातचीत का सबसे अहम और संवेदनशील पहलू है। उपलब्ध आधिकारिक सार्वजनिक विवरण में 100 फीसदी टैरिफ पर सीधे चर्चा होने की पुष्टि नहीं है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वेंस ने फोन पर मोदी को 100 फीसदी टैरिफ की धमकी दी या दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर कोई समझौता किया। इतना जरूर है कि बातचीत ऐसे समय हुई है जब अमेरिकी सीनेट में भारत जैसे रूस के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर संभावित अतिरिक्त टैरिफ का प्रावधान वाला विधेयक आगे बढ़ चुका है।
यानी टैरिफ का दबाव और मोदी-वेंस की बातचीत एक ही समय में सामने आए हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर दोनों के बीच सीधे संबंध का दावा करना अभी जल्दबाजी होगा।
भारत के सामने अब क्या चुनौती है?
अगर अमेरिकी प्रस्तावित कानून आगे की संसदीय प्रक्रिया पूरी कर लेता है और उसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार पर पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे होने से निर्यातकों पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।
दूसरी तरफ, रूस से सस्ता कच्चा तेल भारत की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण रहा है। इसलिए नई दिल्ली के सामने एक साथ कई हितों का संतुलन साधने की चुनौती होगी—ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू महंगाई, निर्यात हित और अमेरिका के साथ रणनीतिक संबंध।
आगे की नजर अमेरिकी संसद और बातचीत पर
फिलहाल अगला बड़ा पड़ाव अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया होगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रूस के ऊर्जा खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की व्यवस्था कानून का रूप लेती है या नहीं।
इस बीच मोदी और वेंस की बातचीत यह संकेत देती है कि टैरिफ के दबाव के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, रक्षा और तकनीकी सहयोग के व्यापक रिश्ते को बनाए रखने की कोशिश जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि दोनों देश व्यापारिक मतभेदों को किस तरह संभालते हैं और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर अमेरिका का रुख कितना सख्त होता है।
कुल मिलाकर अभी भारत पर 100 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी सीनेट से संबंधित विधेयक जरूर आगे बढ़ चुका है, लेकिन अंतिम कानून और उसके इस्तेमाल की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं मोदी-वेंस की ताजा बातचीत में सार्वजनिक रूप से व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग की बात सामने आई है; 100 फीसदी टैरिफ पर सीधे बातचीत की पुष्टि नहीं हुई है।

















