पटना में बढ़ता छात्र आक्रोश, BPSC और TRE-4.0 पर आमने-सामने सरकार और अभ्यर्थी
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
पटना: बिहार की राजधानी पटना में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार, 25 अगस्त को बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से राजभवन और मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन तथा लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई है।
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70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग फिर बनी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का एक प्रमुख मुद्दा 70वीं BPSC परीक्षा को रद्द करने की मांग है। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन शिकायतों का स्पष्ट और संतोषजनक समाधान होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक BPSC की ओर से परीक्षा रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की गई है। इस कारण अभ्यर्थियों और आयोग के बीच विवाद बना हुआ है।
TRE-4.0 को लेकर क्या है छात्रों की नाराजगी?
आंदोलन का दूसरा बड़ा केंद्र Teacher Recruitment Examination (TRE)-4.0 है। शिक्षक अभ्यर्थी परीक्षा की चयन प्रक्रिया को लेकर कई मांगें उठा रहे हैं। इनमें परीक्षा को एक चरण में कराने, नकारात्मक अंक व्यवस्था पर पुनर्विचार करने तथा भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसी मांगें शामिल हैं। कुछ अभ्यर्थी आधिकारिक विज्ञापन और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्टता चाहते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, TRE-4 से जुड़े अभ्यर्थियों का धरना गर्दनीबाग में भी जारी है। छात्रों का कहना है कि केवल घोषणा या आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए।
गांधी मैदान से राजभवन तक मार्च, डाकबंगला पर बिगड़े हालात
25 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने गांधी मैदान से मार्च शुरू किया। डाकबंगला चौराहे के आसपास पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाया था। प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई।
पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद लाठीचार्ज और हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में झड़प के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी बात कही गई है।

विवादित बयान के बाद और बढ़ा छात्रों का गुस्सा
छात्र आंदोलन के बीच BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी भी विवाद का विषय बनी। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन को लेकर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान के बाद बिहार सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई को सरकार की ओर से स्थिति को शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार और छात्रों के बीच समाधान की राह अभी कठिन
छात्र आंदोलन अब केवल एक परीक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। BPSC, शिक्षक भर्ती, परीक्षा प्रक्रिया, पारदर्शिता और भर्ती में देरी जैसे मुद्दों को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष लगातार सामने आ रहा है।
सरकार की ओर से छात्रों की शिकायतों को सुनने और समाधान की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए गए हैं। वहीं, आंदोलनकारी छात्र कई मांगों पर लिखित और स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगी।
दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष
पटना में BPSC और TRE-4.0 को लेकर जारी छात्र आंदोलन ने बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को एक बार फिर राजनीतिक तथा प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल छात्रों की प्रमुख मांगों और सरकार के रुख के बीच पूरी सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है और सरकार छात्रों की मांगों पर क्या ठोस फैसला लेती है, इस पर अभ्यर्थियों के साथ-साथ पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।















