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BPSC विवाद पर बिहार की सियासत गरमाई: सम्राट चौधरी का एक्शन, तेजस्वी ने CM को लिखी चिट्ठी

BPSC परीक्षा नियंत्रक की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब सियासी मुद्दा बना; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए, तेजस्वी यादव ने छात्रों की मांगों पर मुख्यमंत्री से तत्काल पहल की मांग की।

न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष

पटना में छात्रों का आंदोलन बना बिहार की सियासत का नया केंद्र

पटना: बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षक भर्ती से जुड़े सवालों को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब सीधे राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की एक टिप्पणी के बाद विवाद और तेज हुआ, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

विवाद की शुरुआत 24 अगस्त को BPSC की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुई। अभ्यर्थियों से जुड़े सवाल पर परीक्षा नियंत्रक ने ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ वाली कहावत का इस्तेमाल किया। इसके बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने इसे अपने प्रति अपमानजनक टिप्पणी माना। अधिकारी ने बाद में सफाई देते हुए कहा कि उनका आशय किसी व्यक्ति या समूह की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और उन्होंने अपने कथन पर खेद जताया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिए निलंबन के निर्देश

विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले का संज्ञान लिया। रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को BPSC के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के निलंबन की कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सरकार की इस कार्रवाई को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मामला केवल एक अधिकारी की टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। इसके साथ ही TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया, नेगेटिव मार्किंग और परीक्षा के दो चरणों में आयोजन को लेकर अभ्यर्थियों की पुरानी नाराजगी भी फिर सामने आ गई है।

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BPSC विवाद पर बिहार में सियासी घमासान (सांकेतिक/फ़ाइल /फोटो/दैनिक भारतवर्ष)

TRE-4 को लेकर क्या है अभ्यर्थियों की नाराजगी?

BPSC की ओर से TRE-4 को लेकर परीक्षा को दो चरणों—प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा—में आयोजित करने की बात स्पष्ट की गई है। अभ्यर्थियों के एक वर्ग की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में बदलाव किया जाए और नेगेटिव मार्किंग हटाई जाए। BPSC ने इन मांगों को स्वीकार नहीं करने का रुख रखा है।

यही वजह है कि पटना के गर्दनीबाग में चल रहा प्रदर्शन केवल एक बयान के विरोध तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थी परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर भी अपनी आवाज उठा रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी

इसी बीच बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर छात्रों की मांगों पर तत्काल और ठोस पहल करने की अपील की है। 25 अगस्त को सामने आए पत्र में उन्होंने TRE-4 से जुड़े छात्र आंदोलन सहित युवाओं से जुड़े कई मुद्दों को उठाया और सरकार से कार्रवाई की मांग की।

तेजस्वी यादव इससे पहले भी प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में सामने आ चुके हैं। उन्होंने BPSC अधिकारी की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए माफी की मांग की थी।

विवाद का राजनीतिक असर क्या होगा?

BPSC विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बिहार में युवाओं, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श के महत्वपूर्ण हिस्से बने हुए हैं। ऐसे में विपक्ष को सरकार को घेरने का एक और मुद्दा मिल गया है, जबकि सरकार की ओर से अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करके यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दे रही है कि छात्रों के प्रति कथित तौर पर अनुचित भाषा को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम का वास्तविक राजनीतिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अभ्यर्थियों की परीक्षा संबंधी मूल मांगों पर आगे क्या फैसला करती है।

बयान से आगे बढ़कर अब परीक्षा व्यवस्था पर नजर

ताजा घटनाक्रम में दो अलग-अलग पहलू साफ दिखाई दे रहे हैं। पहला, विवादित टिप्पणी पर सरकार की त्वरित कार्रवाई और दूसरा, TRE-4 तथा अन्य परीक्षा संबंधी मांगों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन।

इसलिए आने वाले दिनों में सिर्फ BPSC अधिकारी पर हुई कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सरकार और अभ्यर्थियों के बीच होने वाली बातचीत तथा परीक्षा प्रक्रिया में किसी संभावित बदलाव पर भी नजर रहेगी।

दैनिक भारतवर्ष निष्कर्ष: BPSC विवाद ने बिहार में प्रशासन, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवा राजनीति के बीच संबंधों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सरकार की कार्रवाई से तत्काल विवाद को नियंत्रित करने की कोशिश जरूर हुई है, लेकिन अभ्यर्थियों की मूल मांगों का समाधान होना ही इस पूरे प्रकरण का निर्णायक अगला चरण होगा।

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