रूस के साथ जारी जंग के बीच चुनाव कराने की मांग पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने जताई गंभीर चिंता; पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव के प्रस्ताव के बाद तेज हुई राजनीतिक बहस
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
यूक्रेन: रूस के साथ जारी युद्ध के बीच यूक्रेन में चुनाव कराने का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने युद्ध के दौरान चुनाव कराने के प्रस्ताव को देश के लिए बेहद जोखिम भरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराने से यूक्रेन के भीतर गंभीर राजनीतिक विभाजन पैदा हो सकता है और राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ सकती है।
यह विवाद यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव की उस सार्वजनिक मांग के बाद तेज हुआ, जिसमें उन्होंने युद्ध के बीच लोकतांत्रिक चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की वकालत की थी। फेदोरोव को जुलाई में रक्षा मंत्री पद से हटाया गया था। उनके बयान को जेलेंस्की सरकार के लिए युद्ध शुरू होने के बाद की सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक राजनीतिक चुनौतियों में से एक माना जा रहा है।
जेलेंस्की ने चुनाव को लेकर क्या कहा?
जेलेंस्की का तर्क है कि युद्ध के दौरान चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं होगा, बल्कि इससे समाज और राज्य की एकता पर भी असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक रूस के साथ संघर्ष जारी रहने की स्थिति में चुनाव कराने से यूक्रेन में आंतरिक विभाजन बढ़ने का खतरा है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि कभी युद्धकाल में चुनाव कराने की परिस्थितियां बनती हैं तो इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत सुरक्षा गारंटी जरूरी होगी, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों, अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिकों और विदेशों में रह रहे विस्थापित यूक्रेनी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
पूर्व रक्षा मंत्री फेदोरोव की मांग से बढ़ा विवाद
पूर्व रक्षा मंत्री मायखाइलो फेदोरोव ने युद्ध के दौरान चुनाव कराने की मांग करके यूक्रेन की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि देश को लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि, मौजूदा यूक्रेनी कानून के तहत मार्शल लॉ लागू रहने के दौरान चुनाव कराना प्रतिबंधित है।
फेदोरोव कभी जेलेंस्की के करीबी सहयोगियों में गिने जाते थे। रक्षा मंत्रालय से उनकी अचानक विदाई के बाद यूक्रेन में राजनीतिक असंतोष और विरोध-प्रदर्शन भी देखने को मिले थे। इस पृष्ठभूमि में उनका चुनाव का मुद्दा उठाना जेलेंस्की सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
युद्धकाल में चुनाव क्यों मुश्किल?
यूक्रेन में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद मार्शल लॉ लागू है। ऐसी स्थिति में चुनाव कराना केवल राजनीतिक निर्णय का मामला नहीं है। सुरक्षा, मतदान केंद्रों की उपलब्धता, विस्थापित नागरिकों की भागीदारी और रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मतदान अधिकार जैसे कई व्यावहारिक सवाल भी सामने आते हैं।
इसके अलावा युद्ध के कारण बड़ी संख्या में यूक्रेनी नागरिक देश के भीतर विस्थापित हैं या विदेशों में रह रहे हैं। ऐसे में पूरे देश में समान और सुरक्षित मतदान प्रक्रिया संचालित करना बड़ी चुनौती होगी।
क्या यूक्रेन में जल्द चुनाव होंगे?
फिलहाल ऐसा कोई स्पष्ट संकेत नहीं है कि यूक्रेन में तत्काल चुनाव होने जा रहे हैं। जेलेंस्की का मौजूदा रुख युद्ध की समाप्ति और देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि चुनाव की संभावना पर तभी गंभीरता से विचार किया जा सकता है जब उसके लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय गारंटी उपलब्ध हो।
इस बीच रूस के साथ युद्ध भी जारी है। जेलेंस्की ने हालिया बयानों में रूस की संभावित नई सैन्य लामबंदी और यूक्रेन के सामने मौजूद रक्षा संबंधी चुनौतियों को लेकर भी चिंता जताई है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर?
यूक्रेन में चुनाव का सवाल केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित यूक्रेन के सहयोगी देश युद्ध समाप्त करने और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में चुनाव का मुद्दा यूक्रेन की राजनीतिक वैधता, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और युद्ध के बाद की सत्ता व्यवस्था से भी जुड़ जाता है।
24 अगस्त को यूक्रेन के समर्थन में काम कर रहे कई देशों के नेताओं की कीव में बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में जेलेंस्की का चुनाव संबंधी बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन को सैन्य सहायता, सुरक्षा गारंटी और रूस के साथ संभावित शांति प्रक्रिया को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत है।
दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष
यूक्रेन में युद्धकालीन चुनाव का विवाद फिलहाल दो महत्वपूर्ण सवालों के बीच खड़ा है—लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जारी रखने की मांग और युद्ध के बीच राष्ट्रीय एकता व सुरक्षा बनाए रखने की जरूरत। जेलेंस्की जहां तत्काल चुनाव को देश के लिए गंभीर खतरा मान रहे हैं, वहीं फेदोरोव की मांग ने यूक्रेन की राजनीति में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सत्ता की जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर यूक्रेन के भीतर ही नहीं, बल्कि उसके यूरोपीय और अमेरिकी सहयोगियों के बीच भी चर्चा तेज होने की संभावना है।















