मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव से पहले अंबुमणि रामदास का बड़ा फैसला, TVK-AIADMK के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले नया राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) ने स्पष्ट किया है कि वह 6 अक्टूबर को होने वाले दोनों उपचुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को समर्थन नहीं देगी। पार्टी अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने राज्य पदाधिकारियों और दोनों विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े जिला स्तर के नेताओं के साथ विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय घोषित किया।
पीएमके का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने एआईएडीएमके और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था। उपचुनावों में एआईएडीएमके को पीएमके के समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन अब पार्टी ने दोनों सीटों पर तटस्थ रहने का निर्णय लिया है।
क्यों हो रहा है इन दो सीटों पर उपचुनाव?
मदुरांतकम और धारापुरम दोनों सीटें पहले एआईएडीएमके के पास थीं। इन सीटों से निर्वाचित विधायकों—मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा—ने बाद में विधायक पद से इस्तीफा देकर टीवीके का दामन थाम लिया। इसके बाद दोनों विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव की स्थिति बनी। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान 6 अक्टूबर को और मतगणना 9 अक्टूबर 2026 को होगी।
टीवीके ने दोनों सीटों से उन्हीं पूर्व विधायकों को उम्मीदवार बनाया है। वहीं डीएमके, एआईएडीएमके, वाम दल और नाम तमिलर कच्ची भी चुनाव मैदान में हैं। इस वजह से दोनों सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला बन गया है।
PMK के फैसले से क्या बदला?
पीएमके ने फिलहाल किसी उम्मीदवार या गठबंधन के पक्ष में समर्थन घोषित नहीं किया है। पार्टी के इस निर्णय के बाद तमिलनाडु में उसके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
DT Next ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि पीएमके अपने भविष्य के गठबंधन समीकरणों पर पुनर्विचार कर सकती है और टीवीके के नेतृत्व वाले राजनीतिक मोर्चे के साथ संभावित नजदीकी को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा चल रही है। हालांकि, पीएमके की ओर से टीवीके के साथ गठबंधन की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
TVK के लिए भी अहम हैं दोनों उपचुनाव
तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद मदुरांतकम और धारापुरम के उपचुनावों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों सीटों के पूर्व एआईएडीएमके विधायक अब टीवीके के उम्मीदवार हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये उपचुनाव टीवीके सरकार के करीब 100 दिनों के बाद मतदाताओं के बीच उसकी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा के तौर पर देखे जा रहे हैं। दूसरी ओर, एआईएडीएमके के लिए भी ये सीटें महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि उसके पूर्व विधायकों के टीवीके में जाने के बाद यहां मुकाबला हो रहा है।
टीवीके ने बनाया है नया गठबंधन
टीवीके के नेतृत्व में कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके और आईयूएमएल सहित दलों का एक नया राजनीतिक मोर्चा सितंबर में औपचारिक रूप से सामने आया था। इसे ‘सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस’ नाम दिया गया है और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को इस गठबंधन का नेता चुना गया है।
हालांकि, उपचुनावों में वाम दलों ने दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि पीएमके ने किसी भी दल का समर्थन नहीं करने का फैसला किया है। इससे दोनों विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक मुकाबला और अधिक बहुकोणीय हो गया है।
आगे क्या?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उपचुनाव के बाद पीएमके अपने गठबंधन को लेकर क्या अंतिम निर्णय लेगी। टीवीके के साथ संभावित नजदीकी की खबरें मुख्यतः सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषणों पर आधारित हैं, जबकि पार्टी का आधिकारिक वर्तमान फैसला केवल इतना है कि वह मदुरांतकम और धारापुरम उपचुनाव में किसी भी दल का समर्थन नहीं करेगी।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
तमिलनाडु में 6 अक्टूबर के उपचुनाव सिर्फ दो विधानसभा सीटों तक सीमित नहीं दिख रहे हैं। पीएमके की तटस्थता और टीवीके के साथ संभावित भविष्य के समीकरणों की चर्चा ने राज्य की गठबंधन राजनीति पर भी ध्यान केंद्रित कर दिया है। हालांकि, किसी नए गठबंधन पर अंतिम निर्णय की पुष्टि अभी बाकी है।















