1 लाख डॉलर वाली भुगतान-शर्त एक साल और बढ़ी, 21 सितंबर 2027 तक जारी रहेगा अमेरिकी आदेश; अदालत में मामला अभी लंबित
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीय तकनीकी और अन्य उच्च-कौशल पेशेवरों से जुड़ी H-1B वीजा व्यवस्था को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ नए H-1B कर्मचारियों के लिए 1 लाख डॉलर के भुगतान से जुड़ी प्रवेश-शर्त को एक और वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। नया आदेश 21 सितंबर 2027 तक प्रभावी रखने का प्रावधान करता है।
यह फैसला खास तौर पर भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारत में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी।
क्या है अमेरिका का नया H-1B फैसला?
अमेरिकी राष्ट्रपति की 18 सितंबर 2026 की उद्घोषणा के अनुसार, कुछ H-1B कर्मचारियों को अमेरिका में प्रवेश के लिए उनके नियोक्ता की ओर से 1 लाख डॉलर का भुगतान किए जाने की शर्त के दायरे में रखा गया है। यह व्यवस्था खास तौर पर उन संबंधित H-1B कर्मचारियों पर केंद्रित है जो अमेरिका से बाहर हैं और जिन्हें नए H-1B रोजगार के लिए अमेरिका में प्रवेश करना है।
नए आदेश के तहत यह प्रतिबंध 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होकर, मौजूदा व्यवस्था के अनुसार, 21 सितंबर 2027 तक जारी रहने के लिए बढ़ाया गया है। हालांकि कुछ परिस्थितियों में अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सचिव राष्ट्रीय हित के आधार पर छूट दे सकते हैं।
भारतीय पेशेवरों पर क्यों है इसका खास असर?
H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। IT, इंजीनियरिंग, रिसर्च और दूसरे विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में इसका व्यापक इस्तेमाल होता है।
भारतीय पेशेवर इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में हैं। USCIS के वित्त वर्ष 2024 के आंकड़ों के मुताबिक स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारत में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत थी, जबकि चीन में जन्मे लाभार्थियों की हिस्सेदारी 11.7 प्रतिशत रही।
इसी वजह से H-1B से जुड़े अमेरिकी नियमों में होने वाला बदलाव भारतीय IT कंपनियों, अमेरिकी नियोक्ताओं और अमेरिका में करियर बनाने की तैयारी कर रहे भारतीय पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन 1 लाख डॉलर की रकम अभी वसूली जा रही है या नहीं?
यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। अमेरिकी अदालत में 1 लाख डॉलर की भुगतान-शर्त को चुनौती दी गई है।
जून 2026 में मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने प्रशासन द्वारा लगाई गई भुगतान-शर्त को अवैध करार देते हुए इसे लागू करने की कार्रवाई को रद्द कर दिया था। इसके बाद अमेरिकी सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन संबंधित अपीलीय अदालत ने सरकार को तत्काल इस फैसले पर रोक देने की अनुमति नहीं दी। इसलिए 18 सितंबर का नया राष्ट्रपति आदेश अपने आप अदालत के आदेश को खत्म नहीं करता।
इसका अर्थ है कि “1 लाख डॉलर की फीस अब निश्चित रूप से वसूली जा रही है” कहना वर्तमान स्थिति का पूरा और सही चित्र नहीं होगा। इसकी कानूनी स्थिति अभी अदालतों में विचाराधीन है।
मौजूदा H-1B धारकों के लिए क्या स्थिति है?
नई व्यवस्था का मुख्य फोकस कुछ नए H-1B कर्मचारियों पर है, खासकर ऐसे लोगों पर जो अमेरिका से बाहर हैं और नए H-1B रोजगार के आधार पर प्रवेश चाहते हैं।
यह व्यवस्था हर मौजूदा H-1B धारक पर समान रूप से लागू होने वाली सामान्य प्रवेश-फीस नहीं है। इसी तरह H-1B नवीनीकरण और अमेरिका के भीतर स्थिति बदलने वाले मामलों की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए किसी व्यक्ति के मामले में अंतिम स्थिति उसके वीजा, याचिका और आवेदन की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
H-1B आवेदनों की जांच भी होगी ज्यादा सख्त
अमेरिकी प्रशासन ने केवल भुगतान-शर्त को आगे नहीं बढ़ाया है, बल्कि H-1B कार्यक्रम में जांच को मजबूत करने के लिए अलग प्रशासनिक कदम भी उठाए हैं।
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिकी कर्मचारियों की हालिया या प्रस्तावित छंटनी जैसे कारकों को भी H-1B आवेदन की समीक्षा में ध्यान में रखा जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इससे उन मामलों की अतिरिक्त जांच हो सकेगी जहां अमेरिकी कर्मचारियों को हटाने के बाद विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति का जोखिम माना जाता है।
अमेरिकी प्रशासन ने क्या तर्क दिया?
व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का कुछ नियोक्ताओं और IT स्टाफिंग/आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा दुरुपयोग हुआ है और कुछ मामलों में विदेशी कर्मचारियों के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों को कम वेतन पर बदलने की समस्या सामने आई है। इसी आधार पर प्रशासन ने अधिक सख्त जांच और 1 लाख डॉलर की भुगतान-शर्त को उचित बताया है।
दूसरी ओर, इस नीति की वैधता को लेकर अमेरिकी अदालतों में चुनौती जारी है। इसलिए प्रशासन के तर्क और वर्तमान कानूनी स्थिति को अलग-अलग समझना जरूरी है।
भारतीय युवाओं और IT सेक्टर के लिए क्या मायने?
H-1B व्यवस्था भारत-अमेरिका के तकनीकी और पेशेवर आवागमन का एक महत्वपूर्ण माध्यम रही है। भारतीय पेशेवरों की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए नियमों में लगातार बदलाव से अमेरिकी नौकरी की योजना बना रहे लोगों और उन्हें नियुक्त करने वाली कंपनियों के लिए लागत तथा कानूनी अनिश्चितता बढ़ सकती है।
हालांकि किसी एक व्यक्ति की नौकरी, वीजा या अमेरिका में प्रवेश पर क्या असर पड़ेगा, यह उसके आवेदन और मौजूदा आव्रजन स्थिति पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल इस आदेश के आधार पर सभी भारतीय H-1B आवेदकों के लिए एक समान परिणाम मानना उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अब इस मामले में अमेरिकी अदालतों की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिबंध को सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है, वहीं दूसरी तरफ 1 लाख डॉलर की भुगतान-शर्त की वैधता को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है।
इसलिए भारतीय पेशेवरों और कंपनियों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी आदेश, अदालतों के फैसले और संबंधित आव्रजन अधिकारियों की लागू प्रक्रिया—तीनों को साथ देखकर ही किसी H-1B मामले की स्थिति समझी जाए।
दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष
अमेरिका का H-1B से जुड़ा नया फैसला भारतीय IT और उच्च-कौशल पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत इस वीजा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश है। लेकिन 1 लाख डॉलर भुगतान-शर्त के विस्तार को तत्काल और अंतिम रूप से लागू फीस मानना सही नहीं होगा, क्योंकि इसकी कानूनी वैधता पर अमेरिकी अदालतों में मामला अभी जारी है। आने वाले समय में अदालतों के फैसले इस नीति की वास्तविक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।















