जिस महिला की हत्या के मामले में ससुराल पक्ष के लोगों को जेल जाना पड़ा, वही झारखंड में मिली; पुलिस ने नए सिरे से शुरू की जांच
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
सासाराम/डेहरी आन सोन: रोहतास जिले में 12 साल पुराने हत्या के एक मामले ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। वर्ष 2014 में जिस विवाहिता शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी को मृत मान लिया गया था, उसे पुलिस ने झारखंड के गढ़वा जिले से जीवित बरामद किया है। इस खुलासे के बाद उस समय मिले अज्ञात शव की पहचान, पुलिस अनुसंधान और हत्या के मामले में हुई कार्रवाई को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस ने महिला को 11 सितंबर 2026 से पहले झारखंड के गढ़वा जिले से बरामद किया था, लेकिन बरामदगी की सटीक तारीख और समय पुलिस ने सार्वजनिक रूप से नहीं बताया है।
इतना स्पष्ट है कि:
- रोहतास पुलिस को महिला के जीवित होने की सूचना मिली।
- एसपी राज के निर्देश पर डेहरी मुफस्सिल थाना की पुलिस टीम गढ़वा भेजी गई।
- टीम ने गढ़वा के कांडी थाना क्षेत्र के लभारी गांव से महिला को सकुशल बरामद किया।
- इसके बाद उसे रोहतास लाया गया और सासाराम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
2014 में अचानक गायब हुई थी शकुंतला
मामला रोहतास के डेहरी मुफस्सिल थाना क्षेत्र से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी वर्ष 2014 में अपने ससुराल से अचानक लापता हो गई थीं। इसके बाद उनके मायके पक्ष की ओर से 20 अगस्त 2014 को हत्या का मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस को बाद में एक अज्ञात महिला का शव मिला, जिसकी पहचान शकुंतला के रूप में किए जाने की बात सामने आई।
शव की पहचान के बाद पति समेत ससुराल वालों पर हुई कार्रवाई
शकुंतला को मृत मानकर उसके पति और ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ हत्या का मामला आगे बढ़ा। रिपोर्टों के अनुसार पति समेत ससुराल परिवार के आठ लोगों को जेल जाना पड़ा। परिवार ने बाद में दावा किया कि अज्ञात शव की पहचान के पर्याप्त सत्यापन के बिना उसे शकुंतला मान लिया गया था। इस मामले में परिवार को लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा।
गुप्त सूचना ने 12 साल पुराने मामले को पलट दिया
मामले में नया मोड़ तब आया, जब पुलिस को सूचना मिली कि शकुंतला देवी उर्फ कांति देवी झारखंड के गढ़वा क्षेत्र में जीवित रह रही हैं। सूचना का सत्यापन करने के बाद रोहतास एसपी के निर्देश पर पुलिस टीम झारखंड पहुंची और महिला को सकुशल बरामद कर रोहतास लाई।
न्यायालय में बयान दर्ज, पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया
बरामदगी के बाद महिला को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उसका धारा 164 के तहत बयान भी दर्ज कराया गया। पुलिस की ओर से महिला पर पुलिस को गुमराह करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब पुलिस पूरे घटनाक्रम की नए सिरे से जांच कर रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल—2014 में मिला शव किसका था?
महिला के जीवित मिलने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि वर्ष 2014 में जिस अज्ञात महिला का शव मिला था, उसकी वास्तविक पहचान क्या थी? यदि वह शव शकुंतला का नहीं था, तो उसकी पहचान किस आधार पर की गई और उस आधार पर हत्या का मामला कैसे आगे बढ़ा—इन सवालों का जवाब अब जांच में तलाशना होगा।
परिवार ने जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की
इस पूरे घटनाक्रम के सामने आने के बाद परिवार की ओर से तत्कालीन जांच प्रक्रिया में शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच कराने और यदि लापरवाही सामने आए तो जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है। वहीं पुलिस के सामने अब 12 साल पुराने पूरे मामले की कड़ियों को दोबारा जोड़ने की चुनौती है।
‘दैनिक भारतवर्ष’ की नजर में क्यों अहम है मामला
यह मामला केवल एक महिला के 12 साल बाद जीवित मिलने तक सीमित नहीं है। इसके साथ अज्ञात शव की पहचान, पुलिस जांच की विश्वसनीयता, लंबे समय तक चले मुकदमे और निर्दोष लोगों को हुई कानूनी परेशानी जैसे गंभीर सवाल जुड़े हैं। इसलिए अब आगे होने वाली पुलिस जांच और न्यायालय में महिला के दर्ज बयान से इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
दैनिक भारतवर्ष — “व्यूज़ नहीं, न्यूज़ की बात”















