स्थानांतरण के बाद नए अनुसंधानकर्ताओं को लंबित मामलों का प्रभार नहीं सौंपने पर कार्रवाई, एसपी ने कहा—अनुसंधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
सासाराम: रोहतास जिले में लंबित कांडों के अनुसंधान को लेकर पुलिस अधीक्षक राज ने सख्त रुख अपनाया है। स्थानांतरण के बाद अपने पास लंबित कांडों का प्रभार नए अनुसंधानकर्ताओं को नहीं सौंपने वाले 33 पुलिस पदाधिकारियों का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने की कार्रवाई की गई है। एसपी के निर्देश पर गुरुवार शाम यह कार्रवाई की गई।
पुलिस अधीक्षक राज के अनुसार, स्थानांतरण के बाद संबंधित पुलिस पदाधिकारियों की जिम्मेदारी थी कि उनके पास लंबित कांडों का प्रभार समय पर नए अनुसंधानकर्ताओं को सौंप दिया जाए। इससे नए पदाधिकारियों को मामलों का अनुसंधान आगे बढ़ाने में सुविधा होती और लंबित कांडों के निष्पादन में अनावश्यक देरी नहीं होती।
लेकिन समीक्षा के दौरान सामने आया कि 33 पुलिस पदाधिकारियों ने अब तक लंबित कांडों का प्रभार नए अनुसंधानकर्ताओं को नहीं सौंपा था। पुलिस विभाग ने इसे कार्य के प्रति लापरवाही मानते हुए संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ वेतन रोकने की कार्रवाई की है।
प्रभार नहीं मिलने से प्रभावित हो सकता है अनुसंधान
लंबित कांडों का प्रभार समय पर नहीं मिलने की स्थिति में नए अनुसंधानकर्ता मामले की जांच को प्रभावी ढंग से आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। इससे केस डायरी, साक्ष्य से संबंधित कार्रवाई और अन्य अनुसंधान प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका रहती है। इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
एसपी राज ने स्पष्ट किया कि पुलिस पदाधिकारियों को अपने जिम्मे लंबित कांडों का प्रभार निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर सौंपना होगा। किसी पदाधिकारी की लापरवाही के कारण अनुसंधान लंबित रहता है तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।
लापरवाही पर आगे भी होगी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि लंबित कांडों के अनुसंधान में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कार्य में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
रोहतास पुलिस की इस कार्रवाई को लंबित मामलों के अनुसंधान और निष्पादन में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर स्थानांतरण के बाद मामलों का प्रभार व्यवस्थित तरीके से हस्तांतरित नहीं होने की स्थिति में जांच की निरंतरता प्रभावित होने की संभावना रहती है।
दैनिक भारतवर्ष — ‘व्यूज़ नहीं, न्यूज़ की बात’















