झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ 26 दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन फिलहाल स्थगित, लेकिन परीक्षा रद्द होने से पहले से चयनित और नौकरी कर रहे अभ्यर्थी सरकार के फैसले के खिलाफ मैदान में उतरे; हाईकोर्ट में भी चुनौती
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष
रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद सरकार के एक फैसले के बाद खत्म होने के बजाय एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक पर सरकार ने कार्रवाई करते हुए JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया। इसके बाद एक ओर आंदोलन कर रहे छात्रों ने अपना 26 दिन पुराना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया, वहीं दूसरी ओर उन्हीं परीक्षाओं के जरिए चयनित होकर नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों में असंतोष फैल गया है।
परीक्षा रद्द होने से चयनित अभ्यर्थियों के सामने नई चिंता
JSSC-CGL के जरिए चयनित कुछ अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जो वर्तमान में सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। परीक्षा और उससे जुड़ी चयन प्रक्रिया रद्द किए जाने के बाद अब उन्हें अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी है।
रिपोर्टों के अनुसार करीब 2,000 ऐसे अभ्यर्थी हैं जो JSSC-CGL की प्रक्रिया के जरिए चयनित हुए थे। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि परीक्षा में कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानना उचित नहीं है।
प्रोजेक्ट भवन और सचिवालय के बाहर अभ्यर्थियों का प्रदर्शन
परीक्षा रद्द होने के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों ने रांची में प्रदर्शन किया। 19 अगस्त को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी सचिवालय परिसर तक पहुंच गए। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर परिसर में प्रवेश भी किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और प्रतियोगी परीक्षा के बाद नौकरी हासिल की है। उनका सवाल है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लेकिन उन अभ्यर्थियों का क्या दोष है जिन्होंने बिना किसी अनुचित साधन के परीक्षा पास की?

अभ्यर्थियों का सवाल- ‘दोषियों पर कार्रवाई हो, सभी को सजा क्यों?’
आंदोलन कर रहे चयनित अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी आपत्ति सरकार के फैसले के व्यापक दायरे को लेकर है। उनका तर्क है कि परीक्षा में कथित अनियमितता की जांच और दोषियों की पहचान एक अलग प्रक्रिया है, जबकि पूरी परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द कर देना उन अभ्यर्थियों के लिए भी नुकसानदेह है जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए और जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी की भूमिका को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला, फैसले को चुनौती
परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख भी किया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इस मामले में तीन याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से राहत की मांग की गई है।
अब इस पूरे विवाद में अदालत की भूमिका अहम हो गई है। एक तरफ सरकार का तर्क परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार से जुड़ा है, वहीं दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थी अपने रोजगार और वर्षों की मेहनत की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
सरकार ने क्यों लिया परीक्षा रद्द करने का फैसला?
झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे थे। छात्रों के आंदोलन के दौरान परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती व्यवस्था में सुधार जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।
सरकार ने JSSC-CGL समेत कई परीक्षाओं को रद्द करने के साथ ही पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का निर्णय लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक 2014 के बाद TDPL एजेंसी के जरिए आयोजित परीक्षाओं को लेकर भी जांच का आदेश दिया गया है।
एक आंदोलन थमा, दूसरा आंदोलन सामने आया
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा एक आंदोलन सरकार के फैसले के बाद फिलहाल स्थगित हो गया, लेकिन उसी फैसले से प्रभावित अभ्यर्थियों का दूसरा विरोध शुरू हो गया है।
19 अगस्त को आंदोलनकारी छात्रों ने अपना 26 दिन पुराना आंदोलन स्थगित करते हुए सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया। दूसरी तरफ चयनित अभ्यर्थियों का विरोध लगातार सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।
अब आगे क्या?
JSSC-CGL विवाद अब केवल परीक्षा में कथित अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है। मामला दो अलग-अलग पक्षों के अधिकारों के बीच संतुलन का भी बन गया है। एक तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच चाहते हैं, तो दूसरी तरफ वे सफल अभ्यर्थी हैं जो अपनी नौकरी और चयन की वैधता की रक्षा की मांग कर रहे हैं।
अब सबकी नजर झारखंड हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर है। अदालत का रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि रद्द की गई परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को लेकर आगे की कानूनी स्थिति क्या होगी।
फिलहाल झारखंड का JSSC-CGL विवाद युवाओं के रोजगार, परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

















