24 दिन के आंदोलन के बाद हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, राहुल गांधी ने भी छात्रों की मांगों पर मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ पिछले 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को सोमवार देर रात बड़ी सफलता मिली। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने के साथ TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और संबंधित चयन/नियुक्ति प्रक्रियाओं को निरस्त करने का फैसला लिया गया। सरकार ने वर्ष 2014 के बाद भर्ती परीक्षाओं में सामने आई छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराने की भी बात कही है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आंदोलन कर रहे छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया था। राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध को शांतिपूर्ण बताते हुए उनकी मांगों को न्यायसंगत बताया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह पत्र 17 अगस्त को लिखा गया था।
हालांकि, कैबिनेट का फैसला केवल राहुल गांधी के पत्र का परिणाम था, ऐसा सीधे तौर पर कहना उचित नहीं होगा। छात्र संगठन पहले से ही कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे और सरकार के साथ उनकी बातचीत का दौर भी चल रहा था। इसलिए पूरे घटनाक्रम को छात्रों के लंबे आंदोलन, सरकार के साथ बातचीत और राजनीतिक दबाव—तीनों के संदर्भ में देखना ज्यादा उचित होगा।
▶️ वीडियो: झारखंड छात्र आंदोलन और JSSC-CGL रद्द होने पर पूरी जानकारी
24 दिन तक जारी रहा छात्रों का आंदोलन
JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर झारखंड के अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के दौरान कुछ छात्र नेताओं ने भूख हड़ताल भी की। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने और जांच कराने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत आंदोलन से जुड़े नेताओं ने अनशन समाप्त किया।
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के फैसले को अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, छात्रों की कुछ प्रमुख मांगें अभी भी चर्चा में हैं, खासकर कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को लेकर।
JSSC-CGL रद्द, TDPL की परीक्षाओं पर भी कार्रवाई
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC-CGL परीक्षा पर पड़ा है। इसके अलावा TDPL के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और संबंधित चयन प्रक्रियाओं को भी निरस्त करने की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि वर्ष 2014 के बाद भर्ती परीक्षाओं में हुई छोटी-बड़ी गलतियों और अनियमितताओं की जांच की जाएगी। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि भर्ती प्रक्रिया में कहां और किस स्तर पर खामियां हुईं।
जांच को लेकर छात्रों की नजर सरकार पर
सरकार के फैसले से छात्रों को तत्काल राहत जरूर मिली है, लेकिन आंदोलन के दौरान उठाई गई सभी मांगों का समाधान हो गया है, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। कुछ छात्र संगठन कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग पर अब भी जोर दे रहे हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में सरकार द्वारा गठित जांच व्यवस्था और उसकी रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण होगी। छात्रों की नजर इस बात पर रहेगी कि जांच केवल प्रक्रिया तक सीमित रहती है या वास्तव में जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई भी होती है।

पहले से चयनित अभ्यर्थियों के सामने नई चिंता
JSSC-CGL रद्द किए जाने के बाद एक दूसरा पक्ष भी सामने आया है। परीक्षा में सफल होकर चयनित हो चुके कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा रद्द किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य भी प्रभावित होगा, जिन्होंने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है।
इससे सरकार के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है—एक ओर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की निष्पक्ष भर्ती और पारदर्शिता की मांग है, तो दूसरी ओर पहले से चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य और उनके अधिकारों का सवाल है।
असली परीक्षा अब नई भर्ती व्यवस्था की
JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी प्रक्रियाओं को रद्द करने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब नई, पारदर्शी और भरोसेमंद भर्ती व्यवस्था तैयार करने की है।
छात्रों की लड़ाई केवल एक परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं है। उनका मुख्य सवाल सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभ्यर्थियों के भविष्य की सुरक्षा को लेकर है। इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार नई परीक्षाओं के आयोजन में कौन-से सुरक्षा उपाय अपनाती है और पुरानी गड़बड़ियों की जांच का परिणाम क्या निकलता है।
छात्रों के संघर्ष ने उठाया बड़ा सवाल
झारखंड का यह आंदोलन एक बार फिर यह सवाल सामने लाता है कि सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भरोसा किस तरह कायम रखा जाए। परीक्षा रद्द होना आंदोलनकारियों के लिए बड़ी उपलब्धि जरूर है, लेकिन व्यवस्था में स्थायी सुधार तभी माना जाएगा जब आगे होने वाली भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से हों और किसी भी अनियमितता की स्थिति में जिम्मेदारी तय हो।
दैनिक भारतवर्ष की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई, जांच की प्रगति और नई भर्ती प्रक्रिया पर रहेगी।

















