जम्मू-कश्मीर में 4249 किताबें हटाईं

जम्मू-कश्मीर में 21.81 लाख किताबों की जांच, 4,249 पुस्तकें हटाईं; 1,752 अब भी विशेषज्ञ जांच के दायरे में

विधानसभा में शिक्षा मंत्री का जवाब, जम्मू से 253 और कश्मीर से 3,996 किताबें हटाई गईं; सरकार ने कहा—आपत्तिजनक सामग्री की पहचान के लिए तय मानदंड अपनाए गए

न्यूज़ डेस्क : श्रीनगर | दैनिक भारतवर्ष

जम्मू-कश्मीर में पुस्तकालयों में उपलब्ध किताबों की व्यापक जांच का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार ने बताया है कि पिछले करीब दो महीनों के दौरान केंद्रशासित प्रदेश के विभिन्न पुस्तकालयों में 21,81,582 किताबों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें से 4,249 किताबों को प्रचलन से हटाया गया, जबकि 1,752 किताबों को विशेषज्ञ जांच के लिए भेजा गया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में एक लिखित जवाब में दी।

जम्मू और कश्मीर में कितनी किताबें हटाई गईं?

सरकार के जवाब के अनुसार, प्रचलन से हटाई गई 4,249 किताबों में 253 जम्मू से और 3,996 कश्मीर घाटी से संबंधित हैं। वहीं विशेषज्ञ जांच के लिए भेजी गई 1,752 पुस्तकों में 538 जम्मू और 1,214 कश्मीर घाटी से हैं। सरकार ने यह भी बताया कि जांच के दौरान 518 किताबों को प्रतिबंधित पुस्तकों के रूप में हटाया गया, जिनमें 40 जम्मू और 478 कश्मीर घाटी से थीं।

किस आधार पर हो रही है किताबों की जांच?

शिक्षा मंत्री के मुताबिक, कॉलेजों में उपलब्ध पुस्तकों की जांच के लिए स्पष्ट और वस्तुनिष्ठ मानदंड अपनाए गए हैं। सरकार का कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण होना चाहिए जो संवैधानिक मूल्यों, अकादमिक स्वतंत्रता, आलोचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिम्मेदार नागरिकता तथा भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के सम्मान को बढ़ावा दे।

जुलाई 2026 में शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों की ओर से संबंधित संस्थानों को उपलब्ध सभी पुरानी और नई किताबों की व्यापक स्क्रीनिंग के निर्देश दिए गए थे। इसमें कार्यालयों, कक्षाओं, स्टाफ रूम और पुस्तकालयों में उपलब्ध पुस्तकों को भी शामिल किया गया था।

विधानसभा में उठा किताबों के नाम सार्वजनिक करने का सवाल

यह मामला विधानसभा में अवामी इत्तेहाद पार्टी के विधायक शेख खुर्शीद अहमद के सवाल के बाद सामने आया। उन्होंने किताबों को हटाए जाने की प्रक्रिया और उनके नाम सार्वजनिक किए जाने की मांग उठाई। रिपोर्ट के अनुसार, विधायक ने आशंका जताई कि कश्मीर से संबंधित साहित्य और ऐसी किताबें भी जांच के दायरे में आ रही हैं जिनमें कश्मीर का उल्लेख है। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसे सरकार के जवाब से अलग देखा जाना चाहिए।

सरकार ने कहा है कि आपत्तिजनक सामग्री की पहचान के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जा रही है और जिन किताबों की समीक्षा अभी जारी है, उनकी जांच एक विस्तृत प्रक्रिया होने के कारण इसमें समय लग सकता है।

पहले भी दो किताबों को लेकर हुआ था विवाद

मामले की पृष्ठभूमि में जुलाई 2026 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा दो पुस्तकों को वापस लेने का निर्णय भी शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने “Personalities and Legends of J&K” और “Great Personalities of Jammu and Kashmir” नामक पुस्तकों की सामग्री को अनुचित बताते हुए उन्हें वापस लेने का फैसला किया था। इसके बाद व्यापक पुस्तक स्क्रीनिंग की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसके अलावा, पिछले वर्ष गृह विभाग ने कश्मीर पर लिखी 25 पुस्तकों के प्रकाशन और प्रसार पर प्रतिबंध लगाया था। सरकार ने उस समय इन पुस्तकों पर अलगाववाद और कथित गलत आख्यान को बढ़ावा देने से जुड़े आरोप लगाए थे।

अब आगे क्या?

अभी 1,752 किताबें विशेषज्ञ जांच के लिए भेजी गई हैं, इसलिए इन सभी पुस्तकों को अंतिम रूप से प्रतिबंधित या हटाई गई पुस्तकों की श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा। इनका भविष्य विशेषज्ञ जांच और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगा।

जम्मू-कश्मीर में किताबों की इतनी बड़ी संख्या में स्क्रीनिंग और हजारों पुस्तकों को प्रचलन से हटाए जाने की जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब विधानसभा का शरदकालीन सत्र चल रहा है। इसलिए यह मामला शिक्षा, पुस्तकालयों में उपलब्ध साहित्य और अभिव्यक्ति से जुड़े व्यापक सवालों के कारण चर्चा में है।

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