जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के संयुक्त आयोजन में जुटे कवि और शायर, हिन्दी के बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर हुई चर्चा
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
सासाराम: हिन्दी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सासाराम में कवि सम्मेलन-सह-मुशायरा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिन्दी भाषा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता में उसकी भूमिका और बदलते दौर में हिन्दी के बढ़ते दायरे पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इसके बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिला शिक्षा पदाधिकारी मदन राय ने किया। उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की समृद्धि, संस्कृति, इतिहास और परंपराओं की संवाहिका भी है। उनके अनुसार, भारत के अलग-अलग प्रदेशों और विविध संस्कृतियों को एक सूत्र में जोड़ने में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा कि हिन्दी दिवस को केवल भाषा के उत्सव के रूप में देखने के बजाय इसे भारत की भाषायी विविधता और राष्ट्रीय एकता से जोड़कर समझना चाहिए। उन्होंने संचार, शिक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में हिन्दी के लगातार बढ़ते दायरे पर भी प्रकाश डाला।
हिन्दी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा
कार्यक्रम में शामिल शाहाबाद क्षेत्र के समाजसेवी विवेक कुमार पाण्डेय उर्फ सोनू पाण्डेय ने भी हिन्दी की उपयोगिता और महत्ता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि हिन्दी दिवस देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा में हिन्दी के योगदान को याद करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि अनेक भाषाओं और बोलियों वाले भारत में हिन्दी संवाद और आपसी जुड़ाव की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करती है। उन्होंने हिन्दी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशों में भी हिन्दी के अध्ययन और प्रचार-प्रसार का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
वक्ताओं के संबोधन के बाद कवि सम्मेलन-सह-मुशायरा का सिलसिला शुरू हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे चर्चित कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
आजमगढ़ के शायर अहमद आजमी, फतेहपुर की तरन्नुम नाज, हास्य-व्यंग्य के कवि चकाचौंध ज्ञानपुरी, मिर्जापुर के नरसिंह साहसी, सरोज कुमार पंकज, अख्तर इमाम अंजुम, तनवीर अख्तर, दशरथ प्रजापति और प्रो. राजबहादुर राय ने अपनी कविताओं और शायरी से श्रोताओं का मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों में हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों की झलक भी देखने को मिली।
कार्यक्रम का संचालन मशहूर शायर मतीन सासारामी ने किया, जबकि अध्यक्षता हिन्दी-भोजपुरी के विद्वान डॉ. गुरुचरण सिंह ने की।
कई गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी
आयोजन में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी रजनीश उपाध्याय, शिक्षाकर्मी पंकज कुमार सहित शिक्षा विभाग और प्रशासन से जुड़े पदाधिकारियों तथा अन्य गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान, उसके व्यापक उपयोग और साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम ने भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक संवाद को एक मंच प्रदान किया, जहां हिन्दी के साथ-साथ कविता और शायरी के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को भी सामने रखा गया।















