SIR को लेकर चुनाव आयोग पर विपक्ष का हमला, दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत; उद्धव-राज ठाकरे आज मुंबई में निकाल रहे संयुक्त मार्च
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली/मुंबई | दैनिक भारतवर्ष
देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज होता जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। वहीं, महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे रविवार को मुंबई में संयुक्त मार्च निकाल रहे हैं। इससे चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर चल रहा विवाद राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है।
जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश, करीब 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में
दिल्ली में लगातार दूसरे दिन प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। इसके साथ ही SIR के तहत मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, शनिवार को करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण सहित कई लोग शामिल थे।
इससे एक दिन पहले भी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई हुई थी। दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार के प्रदर्शनों के संबंध में तीन FIR दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार दो FIR संसद मार्ग थाने और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई है। इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
SIR बना विवाद का केंद्र
विरोध कर रहे राजनीतिक दलों और संगठनों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, इन राजनीतिक आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित मानने के बजाय संबंधित घटनाक्रम और चुनावी प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक पक्ष को भी ध्यान में रखना जरूरी है। विवाद का बड़ा हिस्सा इसी बात पर केंद्रित है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और सत्यापन योग्य है।
मुंबई में उद्धव-राज ठाकरे का संयुक्त मार्च
दिल्ली के बाद महाराष्ट्र में भी चुनाव आयोग और SIR के खिलाफ राजनीतिक लामबंदी तेज हो गई है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे रविवार को मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।
यह मार्च खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों नेता लंबे राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस मुद्दे पर एक साथ दिखाई दे रहे हैं। दोनों दलों ने मार्च को व्यापक जनभागीदारी वाला आंदोलन बनाने की कोशिश की है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, मार्च में दोनों दलों के झंडों के बजाय केवल तिरंगा रखने की योजना बनाई गई थी। मार्च बायकुला क्षेत्र से शुरू होकर सीएसएमटी के आसपास तक पहुंचने वाला है।
दिल्ली के बाद महाराष्ट्र में भी बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
SIR को लेकर विरोध अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रह गया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) गुट ने भी ठाकरे गुटों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है। इस तरह मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका का मुद्दा विपक्षी राजनीति में व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है।
आरोपों और आधिकारिक प्रक्रिया के बीच बढ़ा टकराव
इस पूरे विवाद में एक तरफ विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तथा SIR को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक निर्णय और कानूनी प्रावधान अपनी जगह हैं।
ऐसे में मतदाता सूची में किसी नाम को जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया के वास्तविक आंकड़े और सक्षम संस्थाओं की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी इस बहस में सबसे महत्वपूर्ण आधार होंगे।
आगे क्या?
दिल्ली में लगातार प्रदर्शन और मुंबई में ठाकरे बंधुओं का संयुक्त मार्च इस बात का संकेत है कि SIR का मुद्दा आने वाले दिनों में भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि विरोध-प्रदर्शन का दायरा बढ़ता है तो चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि SIR को लेकर उठाए जा रहे राजनीतिक आरोपों, मतदाता सूची में होने वाले बदलावों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया के बीच वास्तविक स्थिति क्या है। इसका जवाब आधिकारिक आंकड़ों, दस्तावेजों और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों से ही स्पष्ट होगा।
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