चार सीटों पर दोनों दलों के उम्मीदवारों की सीधी टक्कर, तेजस्वी यादव ने कहा- पहले भी अलग-अलग चुनाव लड़ चुके हैं
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने कई सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। इसके बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन में किसी तरह के विवाद या मतभेद से इनकार किया है।
23 अक्टूबर को होना है विधान परिषद चुनाव
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को चुनाव होना है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारना शुरू कर दिया है।
RJD ने सितंबर में छह सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित किए थे और दो सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी थीं। इसके बाद कांग्रेस ने पांच उम्मीदवारों की घोषणा की। इनमें कुछ सीटों पर RJD के प्रत्याशियों के सामने कांग्रेस ने भी उम्मीदवार उतार दिए हैं।
चार सीटों पर RJD और कांग्रेस की सीधी टक्कर
उम्मीदवारों की घोषणा के बाद RJD और कांग्रेस के बीच कम से कम चार सीटों पर सीधा मुकाबला बनने की स्थिति सामने आई है। यही वजह है कि बिहार में INDIA ब्लॉक के भविष्य और दोनों दलों के आपसी तालमेल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, तेजस्वी यादव ने इसे गठबंधन टूटने या किसी बड़े मतभेद के तौर पर देखने से इनकार किया। उनका कहना है कि विधान परिषद अथवा स्थानीय निकायों के चुनावों में गठबंधन के दल पहले भी अलग-अलग उम्मीदवार उतारते रहे हैं। इसलिए इसे महागठबंधन में विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
तेजस्वी यादव ने क्या कहा?
पटना लौटने के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन में कोई विवाद नहीं है। उन्होंने पिछले चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस, RJD और वाम दल कई चुनाव अलग-अलग लड़ चुके हैं।
तेजस्वी के मुताबिक स्थानीय निकायों और विधान परिषद के चुनावों की प्रकृति अलग होती है और इनमें सहयोगी दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने को गठबंधन में टूट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछली बार अलग-अलग चुनाव लड़ने के बावजूद RJD ने पांच सीटों पर जीत हासिल की थी।
कांग्रेस-RJD के बीच पहले से चल रहा है मतभेद
हालांकि, मौजूदा घटनाक्रम को केवल सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार उतारने तक सीमित रखना भी पूरी तस्वीर नहीं बताता। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के बाद RJD और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव की खबरें सामने आती रही हैं। विधान परिषद चुनाव में RJD द्वारा पहले छह उम्मीदवारों की घोषणा और उसके बाद कांग्रेस द्वारा अपने प्रत्याशी उतारे जाने से यह मतभेद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार घोषित किए हैं, जिनमें कुछ सीटों पर उसका मुकाबला सीधे RJD प्रत्याशियों से होगा। इससे दोनों दलों के स्थानीय संगठन और समर्थक किस तरह चुनावी रणनीति बनाते हैं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
NDA को मिल सकता है राजनीतिक फायदा?
RJD और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होने से NDA को राजनीतिक फायदा मिलने की संभावना पर भी चर्चा शुरू हो गई है। NDA नेताओं ने इसे विपक्षी एकता की कमजोरी के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया है। हालांकि, अंतिम परिणाम का अनुमान अभी लगाना जल्दबाजी होगी, क्योंकि विधान परिषद के इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता और चुनावी समीकरण सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं।
असली परीक्षा चुनाव परिणाम में होगी
बिहार MLC चुनाव में RJD और कांग्रेस का अलग-अलग मैदान में उतरना फिलहाल राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। तेजस्वी यादव इसे सामान्य चुनावी प्रक्रिया बता रहे हैं, जबकि दूसरी ओर NDA इसे INDIA ब्लॉक के भीतर मतभेद का संकेत बता रहा है।
अब असली सवाल यह होगा कि 23 अक्टूबर के चुनाव में RJD और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवार उतरने का फायदा किसे मिलता है और क्या दोनों दल चुनाव के बाद भी अपने गठबंधन को उसी तरह बनाए रखते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में MLC चुनाव ने RJD-कांग्रेस संबंधों को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।















