रिकॉर्ड जलस्राव के बीच तटबंधों को हुआ नुकसान, छह जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित; विभाग ने लापरवाही पर दिया सख्त संदेश
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
बिहार में गंडक नदी की बाढ़ और तटबंधों को हुए नुकसान के बाद जल संसाधन विभाग ने बाढ़ प्रबंधन में कथित लापरवाही के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने सारण और गोपालगंज में तैनात सात अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
रिकॉर्ड जलस्राव के बीच तटबंधों को हुआ नुकसान
जल संसाधन विभाग के अनुसार, नेपाल और उत्तर प्रदेश में हुई भारी बारिश के कारण गंडक नदी में असाधारण जलस्राव हुआ। नेपाल के देवघाट के साथ-साथ बिहार में बगहा, डुमरियाघाट, रेवाघाट और लालगंज में भी नदी का जलस्तर पुराने उच्चतम स्तरों को पार कर गया।
इस दौरान गंडक के तटबंधों को कई स्थानों पर नुकसान पहुंचा और कुछ जगहों पर बाढ़ का पानी फैल गया। विभागीय निरीक्षण में बाढ़ जैसी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए तैयार की गई कार्ययोजना के क्रियान्वयन में कथित शिथिलता सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
किन लापरवाहियों को लेकर हुई कार्रवाई?
विभाग के अनुसार, कुछ अभियंताओं पर आरोप है कि तटबंध क्षतिग्रस्त होने की आकस्मिक स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। कुछ स्थानों पर पर्याप्त मैनपावर और सामग्री की व्यवस्था तथा उनके प्रबंधन में भी कमी पाई गई।
इसके अलावा स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के साथ आवश्यक समन्वय की कमी की बात भी विभागीय निरीक्षण में सामने आई। विभाग का कहना है कि ब्रीच स्थल पर मौजूद रहकर उपलब्ध संसाधनों और मैनपावर के माध्यम से कट-एंड को सुरक्षित करने की जरूरत थी, लेकिन कुछ मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इन सात अभियंताओं को किया गया निलंबित
जल संसाधन विभाग की कार्रवाई के तहत निलंबित अभियंताओं में शामिल हैं—
- संतोष कुमार प्रभाकर — कार्यपालक अभियंता, छपरा
- मो. साजिद इकबाल — कार्यपालक अभियंता, गोपालगंज
- सुनील कुमार — सहायक अभियंता, छपरा
- विनोद कुमार — सहायक अभियंता, छपरा
- मो. जावेद अंसारी — सहायक अभियंता, गोपालगंज
- चंद्रशेखर कुमार — कनीय अभियंता, छपरा
- विकास कुमार — कनीय अभियंता, गोपालगंज
वहीं मुजफ्फरपुर के मुख्य अभियंता कुमार मनोज गुप्ता के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। उनके मामले में चंपारण तटबंध को नुकसान पहुंचने और उसके बाद की जाने वाली आकस्मिक प्रतिक्रिया में कथित शिथिलता को आधार बनाया गया है।
गंडक नदी का जलस्तर अब घट रहा
कार्रवाई के बीच राहत की बात यह है कि गंडक नदी का जलस्तर अब तेजी से नीचे आ रहा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, सारण के रेवाघाट में नदी का जलस्तर अपने रिकॉर्ड उच्चतम स्तर से 177 सेंटीमीटर नीचे आ चुका है और खतरे के निशान से करीब 50 सेंटीमीटर नीचे है।
वहीं वैशाली के लालगंज में जलस्तर में 130 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई है, हालांकि वहां पानी अभी भी खतरे के निशान से लगभग 52 सेंटीमीटर ऊपर बताया गया है। विभाग को अगले 24 घंटे में लालगंज में भी जलस्तर के खतरे के निशान से नीचे आने की उम्मीद है।
छह जिलों में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित
हालिया गंडक बाढ़ का प्रभाव बिहार के कई जिलों में देखने को मिला। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, दरभंगा और मुजफ्फरपुर के 30 प्रखंडों की 169 ग्राम पंचायतों में करीब 9.87 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बड़ी संख्या में नावें, सामुदायिक रसोई और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। प्रभावित लोगों के बीच पॉलीथिन शीट और सूखा राशन भी वितरित किया गया है।
विभाग ने लापरवाही पर दिया सख्त संदेश
जल संसाधन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आपदाजन्य और आकस्मिक परिस्थितियों में किसी भी स्तर पर शिथिलता या लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभागीय कार्रवाई के जरिए यह संदेश दिया गया है कि बाढ़ जैसी आपदा के दौरान तटबंधों की निगरानी, संसाधनों की उपलब्धता और तत्काल प्रतिक्रिया में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
गंडक के जलस्तर में गिरावट से तत्काल राहत के संकेत जरूर मिल रहे हैं, लेकिन हालिया बाढ़ के दौरान तटबंधों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में कथित कमियों को लेकर शुरू हुई कार्रवाई अब प्रशासनिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण मामला बन गई है। सात अभियंताओं का निलंबन और मुख्य अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई इसी दिशा में उठाया गया कदम है।















