पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए दो खेप पहुंचने का पुलिस का दावा, अरनिया थाने में FIR 64/2026 दर्ज
न्यूज़ डेस्क : जम्मू | दैनिक भारतवर्ष
जम्मू-कश्मीर के जम्मू जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे अरनिया इलाके में पुलिस ने ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की कथित तस्करी से जुड़े मामले का खुलासा किया है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान उनके कब्जे से इटली निर्मित बेरेटा पिस्टल, दो मैगजीन, चार जिंदा कारतूस, करीब 500 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान राहुल कुमार और अजय कुमार के रूप में की गई है। दोनों को सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात यानी 5-6 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया।
ड्रोन से दो बार खेप पहुंचने की बात सामने आई
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों से पूछताछ में कथित तौर पर पता चला कि उन्हें ड्रोन के जरिए दो अलग-अलग खेप मिली थीं। इनमें हथियार और नशीले पदार्थ शामिल होने की बात कही गई है। पुलिस अब इन दोनों खेपों के स्रोत और उनसे जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई कि पहली खेप कुछ महीने पहले अरनिया के एक कृषि क्षेत्र में गिराई गई थी। दूसरी खेप को भी पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन के जरिए पहुंचाए जाने का आरोप है।
बेरेटा पिस्टल और करीब एक किलो नशीला पदार्थ बरामद
पुलिस के अनुसार तलाशी और जांच के दौरान इटली निर्मित एक बेरेटा पिस्टल, दो मैगजीन और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। इसके अलावा करीब 500 ग्राम हेरोइन और 500 ग्राम अफीम भी बरामद की गई।
इस तरह बरामद नशीले पदार्थों की कुल मात्रा करीब एक किलोग्राम बताई गई है।
पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क की जांच
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों के पाकिस्तान में मौजूद कथित हैंडलरों से संपर्क होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ड्रोन से खेप कौन भेज रहा था, उसे सीमा के इस पार कौन उठा रहा था और आगे हथियार व नशीले पदार्थ किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे।
NDTV ने पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया है कि आरोपियों के संपर्क पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर एवं कथित खालिस्तानी ऑपरेटिव शहजाद भट्टी से होने की जांच की जा रही है। हालांकि, यह पहलू अभी जांच का हिस्सा है और इसे अदालत द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पंजाब तक हथियार पहुंचाने के एंगल की भी जांच
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ड्रोन से प्राप्त हथियार और नशीले पदार्थों को आगे कहां भेजा जाता था। India Today और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस इस कथित नेटवर्क के पंजाब से जुड़े संपर्कों की भी जांच कर रही है।
इससे मामले का दायरा केवल अरनिया तक सीमित नहीं रह जाता है। जांच एजेंसियां कथित सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं।
अरनिया थाने में FIR 64/2026
मामले में अरनिया पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 64/2026 दर्ज की गई है। पुलिस ने NDPS Act की संबंधित धाराओं के साथ Arms Act के तहत भी मामला दर्ज किया है। आगे की जांच जारी है।
कब हुई गिरफ्तारी और मूल ड्रोन घटना कब की है?
इस मामले में टाइमलाइन को लेकर स्पष्टता जरूरी है। गिरफ्तारी 5 और 6 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात हुई। लेकिन ड्रोन से हथियार और नशीले पदार्थ गिराए जाने की मूल घटनाएं इससे पहले की हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने दो ड्रोन खेप प्राप्त की थीं और पहली खेप कुछ महीने पहले गिराई गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों ड्रोन-ड्रॉप की पूरी सटीक तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है।
इसलिए इसे “6 अक्टूबर को ड्रोन से हथियार गिराए गए” कहना सही नहीं होगा। सही तथ्य यह है कि 6 अक्टूबर को पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां सामने आईं, जबकि कथित ड्रोन-ड्रॉपिंग की घटनाएं पहले हुई थीं।
जांच में आगे क्या?
पुलिस अब कथित नेटवर्क के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य ड्रोन से खेप भेजने वाले लोगों, सीमा पार मौजूद कथित हैंडलरों, खेप प्राप्त करने वालों और आगे हथियार-ड्रग्स पहुंचाने वाले संपर्कों की पहचान करना है।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
अरनिया का यह मामला सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और नशीले पदार्थों की कथित तस्करी के गंभीर सुरक्षा पहलू को सामने लाता है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।



















