डिस्चार्ज याचिका खारिज होने के बाद मुख्यमंत्री की क्रिमिनल रिवीजन याचिका; कथित भूमि अधिग्रहण और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक लड़ाई का नया चरण
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष
रांची: झारखंड की राजनीति में एक बार फिर कानूनी घटनाक्रम चर्चा के केंद्र में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची के बड़गाईं क्षेत्र की कथित 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष PMLA अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर की है।
मुख्यमंत्री की ओर से यह कदम विशेष PMLA अदालत द्वारा उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज किए जाने के बाद उठाया गया है। अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण होगी।
क्या है 8.86 एकड़ भूमि से जुड़ा मामला?
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच की है।
विशेष PMLA अदालत ने जून 2026 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया है।
हेमंत सोरेन की ओर से इस मामले में आरोपों से इनकार किया गया है और अब हाईकोर्ट से निचली अदालत के आदेश में राहत की मांग की गई है।
हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन से क्या बदलेगा?
क्रिमिनल रिवीजन याचिका के माध्यम से निचली अदालत के आदेश की कानूनी समीक्षा की मांग की जाती है। झारखंड हाईकोर्ट अब याचिका और संबंधित कानूनी तथ्यों पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
मामले में हाईकोर्ट की आगामी कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह झारखंड के मुख्यमंत्री से जुड़ा एक चर्चित कानूनी मामला है और इसका राजनीतिक असर भी राज्य में दिखाई दे सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और सक्षम अदालत के अंतिम निर्णय के आधार पर ही माना जाता है।
झारखंड की राजनीति में क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
झारखंड में पहले से ही राजनीतिक दलों के बीच कई मुद्दों पर तीखी बयानबाजी चल रही है। ऐसे समय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का हाईकोर्ट जाना विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का अवसर दे सकता है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार बता सकता है।
आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है। हालांकि, वर्तमान घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मामला अब एक नए कानूनी चरण में प्रवेश कर चुका है।
विशेष PMLA अदालत के आदेश के बाद हाईकोर्ट पहुंचे मुख्यमंत्री
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रांची स्थित विशेष PMLA अदालत ने जून 2026 में मुख्यमंत्री की डिस्चार्ज याचिका खारिज की थी। इसके बाद अगस्त के अंतिम दिनों में मुख्यमंत्री ने झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल कर उस आदेश को चुनौती दी।
झारखंड हाईकोर्ट की कार्यवाही और आगामी सुनवाई पर अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की भी नजर रहेगी।
राजनीतिक बहस और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन जरूरी
झारखंड की राजनीति में यह मामला निश्चित रूप से चर्चा का विषय बना रहेगा, लेकिन कानूनी मामलों में राजनीतिक आरोपों और न्यायिक तथ्यों के बीच अंतर बनाए रखना भी आवश्यक है।
हाईकोर्ट में याचिका दायर होना यह दर्शाता है कि मुख्यमंत्री निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर, जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष का अपना कानूनी पक्ष रहेगा।
अब इस मामले में आगे की स्थिति झारखंड हाईकोर्ट की सुनवाई और आदेशों से अधिक स्पष्ट होगी।
दैनिक भारतवर्ष का निष्कर्ष
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा 8.86 एकड़ भूमि से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हाईकोर्ट का रुख करना राज्य की राजनीति का एक महत्वपूर्ण ताजा घटनाक्रम है। विशेष PMLA अदालत के आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद अब सबकी नजर झारखंड हाईकोर्ट की आगामी कार्रवाई पर रहेगी।
मामले में अंतिम निष्कर्ष आने तक इसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत लंबित प्रकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
















