UPI पर 0.4% MDR को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी नहीं, अंतरिम रोक से इनकार; केंद्र-RBI-NPCI से मांगा जवाब
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
देश में डिजिटल भुगतान के सबसे बड़े माध्यमों में शामिल UPI को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI मर्चेंट लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत Merchant Discount Rate (MDR) को लागू करने पर फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मामले की कानूनी और तकनीकी स्थिति पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट की यह स्थिति 28 सितंबर 2026 की सुनवाई से जुड़ी है। इस मामले की अगली प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करना है। इसलिए अदालत का अंतरिम रोक से इनकार MDR व्यवस्था को अंतिम रूप से वैध ठहराने वाला फैसला नहीं है।
15 अक्टूबर से प्रस्तावित है नई MDR व्यवस्था
केंद्र सरकार द्वारा घोषित ढांचे के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक के निर्धारित Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 निर्धारित की गई है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली है।
हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर UPI भुगतान पर शुल्क लगने वाला है।
आम व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI भुगतान रहेगा मुफ्त
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन पर कोई MDR नहीं लगाया जाएगा, चाहे भुगतान की राशि कितनी भी हो। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे।
सरकार के अनुसार, छोटे कारोबारियों के लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। ₹1 लाख प्रतिमाह तक UPI QR के जरिए प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को इस व्यवस्था के तहत राहत दी गई है।
सरकार का दावा- करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे
केंद्र सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के बावजूद लगभग 96 प्रतिशत P2M UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे। सरकार के मुताबिक MDR केवल निर्धारित श्रेणी के ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। उसके अनुसार यह भुगतान इकोसिस्टम के भीतर संबंधित बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।
किन क्षेत्रों में अलग व्यवस्था होगी?
नई व्यवस्था में कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग MDR दर निर्धारित की गई है। इनमें रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। ₹2,000 से अधिक के निर्धारित लेनदेन पर इन क्षेत्रों में ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है।
वहीं पूंजी बाजार से जुड़े निर्धारित भुगतान पर 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 बताई गई है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका क्यों पहुंचा मामला?
इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए अधिवक्ता अंजन दत्ता ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार की 14 और 15 सितंबर की अधिसूचनाओं तथा MDR ढांचे को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने इसके कानूनी आधार और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
28 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने केंद्र, RBI और NPCI सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा।
अंतरिम रोक नहीं लगने का मतलब क्या है?
फिलहाल इसका सीधा अर्थ यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावित व्यवस्था को तत्काल रोकने का आदेश नहीं दिया है। लेकिन अदालत ने अभी यह अंतिम फैसला भी नहीं दिया है कि MDR व्यवस्था कानूनी रूप से सही है या नहीं।
अदालत की आगे की सुनवाई में केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर इस मुद्दे पर आगे विचार होगा। इसलिए 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था और इसकी कानूनी स्थिति पर आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।
‘दैनिक भारतवर्ष’ की बात
UPI को लेकर सामने आया यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संबंध देश के डिजिटल भुगतान ढांचे, व्यापारियों के भुगतान खर्च और UPI के भविष्य के शुल्क मॉडल से है। हालांकि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार आम P2P UPI भुगतान मुफ्त रहेगा और ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान भी MDR से बाहर हैं। दूसरी ओर, प्रस्तावित MDR की कानूनी वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। इसलिए पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR लागू होने की प्रस्तावित तारीख 15 अक्टूबर है, जबकि अदालत ने अभी इस व्यवस्था की अंतिम वैधता पर फैसला नहीं दिया है।















