कानपुर में करीब 40 हजार लोग प्रभावित, कई घरों में घुसा पानी; राहत-बचाव अभियान तेज
न्यूज़ डेस्क : लखनऊ | दैनिक भारतवर्ष
कानपुर: उत्तर प्रदेश में मानसून की सक्रियता और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ की स्थिति कई इलाकों में गंभीर बनी हुई है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार राज्य के 37 जिलों में बाढ़ का असर सामने आया है, जबकि 25 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं।
कानपुर में पांडु नदी का कहर
कानपुर और कानपुर देहात में पांडु नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से हालात चिंताजनक हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 40 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घरों में कई फीट तक पानी पहुंचने के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा है।
बाढ़ के कारण कुछ प्रमुख मार्गों पर भी आवागमन प्रभावित हुआ है। बिकरू-शिवली मार्ग के प्रभावित होने से स्थानीय लोगों की आवाजाही और राहत कार्यों में भी चुनौती बढ़ी है। एनडीआरएफ की टीमों ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया है।
19 हजार से अधिक लोगों को कराया गया सुरक्षित
राज्य में व्यापक बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अब तक 19,454 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। रविवार को ही 8,264 लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकाला गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल किसी मानव या पशु की मौत की सूचना नहीं दी गई है।
प्रशासन की ओर से राहत कार्यों के लिए 2,075 नावें और 1,315 राहत शिविर लगाए गए हैं। स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए बड़ी संख्या में मेडिकल टीमें भी तैनात की गई हैं, ताकि बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके।
चित्रकूट पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर राहत सामग्री वितरित की और प्रशासनिक अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की जानकारी ली।
रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। कुछ परिवारों को आर्थिक सहायता और भूमि संबंधी दस्तावेज भी सौंपे गए हैं।
वाराणसी में बाढ़ प्रभावित बच्चों की पढ़ाई जारी
बाढ़ का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। वाराणसी में प्रभावित परिवारों के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए राहत शिविरों में अस्थायी कक्षाएं शुरू की गई हैं। शिक्षक इन शिविरों में जाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, ताकि आपदा की स्थिति में भी उनकी शिक्षा जारी रह सके।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
बाढ़ के दौरान प्रशासन के सामने लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ स्वास्थ्य, भोजन, पेयजल और आवागमन जैसी मूलभूत जरूरतों को बनाए रखने की चुनौती है। पानी उतरने के बाद भी कई इलाकों में गंदगी और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में कमी के बाद भी निचले इलाकों में जमा गाद और गंदगी से स्वास्थ्य संबंधी चिंता बनी हुई है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
मौजूदा परिस्थितियों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और अनावश्यक रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी गई है। राहत एवं बचाव दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं।
दैनिक भारतवर्ष के लिए यह खबर उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए नए प्रशासनिक आंकड़े आने पर प्रभावित जिलों और राहत कार्यों की संख्या में बदलाव संभव है।
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