NATO शिखर सम्मेलन के बाद तुर्किये से ब्रिटेन रवाना होते समय हुआ गुप्त विमान बदलाव; ट्रंप ने कहा- Secret Service और सेना के निर्देश पर बदला विमान, उन्हें मिली धमकी के बारे में ज्यादा नहीं पूछा
डिजिटल डेस्क : दैनिक भारतवर्ष | विशेष रिपोर्ट
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन लौटते समय उन्होंने गुप्त रूप से अपना विमान बदला था। यह कदम कथित तौर पर ईरान से जुड़े एक संभावित हमले के खतरे के मद्देनजर उठाया गया था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह फैसला अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि Secret Service और सेना के निर्देश पर लिया था।
Air Force One से चुपचाप दूसरे विमान में पहुंचाए गए ट्रंप
घटना 8 जुलाई 2026 की बताई जा रही है। ट्रंप NATO शिखर सम्मेलन के लिए तुर्किये के अंकारा पहुंचे थे। वापसी के समय वह कैमरों के सामने पुराने Air Force One में सवार हुए, लेकिन कुछ ही देर बाद गुप्त रूप से उससे निकलकर एक छोटे सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाए गए।
Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को Air Force One से दूसरे विमान तक ले जाने के लिए एयरपोर्ट के केटरिंग ट्रक का इस्तेमाल किया गया। ट्रक को विमान के दरवाजे तक उठाया गया और इसी रास्ते से ट्रंप तथा उनके कुछ सहयोगियों को बाहर निकाला गया।
Air Force One को बनाया गया डिकॉय
इस पूरे ऑपरेशन का मकसद ट्रंप की वास्तविक लोकेशन को छिपाना था। ट्रंप के दूसरे सैन्य विमान से रवाना होने के बाद पुराना Air Force One भी ब्रिटेन के लिए उड़ान भरता रहा, जिसमें व्हाइट हाउस के कर्मचारी और पत्रकार मौजूद थे। इस तरह Air Force One को एक तरह के डिकॉय विमान के रूप में इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में मौजूद कई पत्रकारों और कुछ व्हाइट हाउस कर्मचारियों को भी यह जानकारी नहीं थी कि ट्रंप विमान बदल चुके हैं। पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के शेड नीचे रखने के निर्देश दिए गए थे।
ट्रंप बोले- मुझे धमकी के बारे में ज्यादा नहीं बताया गया
11 अगस्त को पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी थी कि कोई खतरा मौजूद है, लेकिन उन्होंने इसके बारे में ज्यादा सवाल नहीं किए।
उन्होंने कहा कि वह Secret Service और सेना के निर्देशों का पालन करते हैं। ट्रंप के मुताबिक, उन्हें लगातार धमकियां मिलती रहती हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि जिस विमान से वह वास्तव में ब्रिटेन गए, उन्हें वह Air Force One की तुलना में ज्यादा जोखिम वाला लगता है, क्योंकि उनके अनुमान में हमलावर उसी विमान को निशाना बनाने की अधिक संभावना रखते।
ईरान से जुड़े खतरे की बात सामने आई
Washington Post की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों को ईरान से जुड़े ट्रंप पर हमले के एक विश्वसनीय खतरे की जानकारी मिली थी। यह ऑपरेशन उस समय हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ा हुआ था।
हालांकि, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में इस संभावित हमले की पूरी योजना, हमले का तरीका या किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में किसी निश्चित हमले की योजना या आरोपी के बारे में दावा करना उचित नहीं होगा।
नया कतर-गिफ्टेड विमान भी चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम ने उस नए Boeing 747-8 विमान की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, जिसे कतर ने अमेरिका को दिया था और जिसे ट्रंप ने तुर्किये जाने के लिए इस्तेमाल किया था। Washington Post के अनुसार, इस विमान में पुराने राष्ट्रपति विमान जैसी सभी रक्षात्मक क्षमताएं मौजूद नहीं थीं, जबकि अमेरिकी प्रशासन ने विमान को सुरक्षित और राष्ट्रपति की सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप बताया है।
ट्रंप तुर्किये से रवाना होने के बाद जिस C-32A सैन्य विमान से ब्रिटेन पहुंचे, उसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ भी उनके साथ थे। बाद में ब्रिटेन में ट्रंप फिर राष्ट्रपति विमान के साथ सार्वजनिक रूप से नजर आए।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पूरा मामला?
राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए विमान बदलने या डिकॉय विमान इस्तेमाल करने की रणनीति पूरी तरह नई नहीं है। हालांकि इस मामले में खास बात यह रही कि ट्रंप की वास्तविक यात्रा को कई घंटे तक सार्वजनिक रूप से छिपाकर रखा गया और जिस Air Force One को लोग राष्ट्रपति का विमान समझ रहे थे, उसमें राष्ट्रपति मौजूद नहीं थे।
कुल मिलाकर ट्रंप ने विमान बदलने की पुष्टि की है और इसे Secret Service तथा सेना के निर्देश से जोड़ते हुए कहा है कि उन्हें खतरे के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई थी। “अगर हमला होता तो Air Force One पर ही होता” ट्रंप का शब्दशः बयान नहीं है; उन्होंने कहा था कि जिस विमान से वह गए, उन्हें वह अधिक जोखिम वाला लगता है क्योंकि हमलावर शायद उसी को निशाना बनाते।


















