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जंतर-मंतर पर तनाव बरक़रार: ‘संसद मार्च’ में लाठीचार्ज के बाद उग्र हुआ CJP का आंदोलन; पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली 

नीट (NEET) परीक्षा में गड़बड़ी और शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांगों को लेकर चल रहा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का विरोध प्रदर्शन अब एक नया मोड़ ले चुका है। हाल ही में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प के बाद जंतर-मंतर पर स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।

देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा लगातार दिल्ली पहुँच रहे हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक उनकी बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह सत्याग्रह खत्म नहीं होगा।

आंदोलन की ताज़ा स्थिति: 5 बड़ी बातें

  • पुलिस कार्रवाई के विरोध में गुस्सा: संसद मार्च के दौरान हुए लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद छात्रों का गुस्सा और भड़क गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग किया।

  • केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग: CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और अन्य युवाओं का मुख्य जोर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर टिका हुआ है।

  • सोनम वांगचुक का समर्थन: लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के इस मंच से जुड़ने और अनशन करने के बाद से इस आंदोलन को नागरिक समाज का व्यापक समर्थन मिला है।

  • दिल्ली पुलिस की सख्त घेराबंदी: जंतर-मंतर से संसद भवन जाने वाले सभी रास्तों पर कई स्तर की बैरिकेडिंग कर दी गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती है।

  • सोशल मीडिया का प्रभाव: पुलिस कार्रवाई के वीडियो ऑनलाइन वायरल होने के बाद से उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और असम से भारी संख्या में छात्र दिल्ली का रुख कर रहे हैं।

क्या है CJP और क्यों शुरू हुआ यह प्रदर्शन?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) मुख्य रूप से युवाओं और छात्रों का एक स्वतंत्र नागरिक आंदोलन है, जिसकी शुरुआत अभिजीत दीपके ने की थी। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी के बाद इस नाम के साथ शुरू हुए ऑनलाइन अभियान ने NEET परीक्षा विवाद के बाद एक विशाल राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले लिया।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:

  1. NEET परीक्षा धांधली की निष्पक्ष जाँच और शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही तय होना।

  2. शिक्षा मंत्री का तत्काल त्यागपत्र।

  3. प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेना और घायल छात्रों को सुरक्षा की गारंटी।

प्रशासन और पुलिस का रुख

दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की और सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीमित बल प्रयोग आवश्यक था।

फिलहाल जंतर-मंतर पर भाषणों, नारों और नुक्कड़ नाटकों के ज़रिए छात्र अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच वार्ता के रास्ते खोजने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों ही पक्ष अपने-अपने रुख पर टिके हुए हैं।

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