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श्रीनगर की सड़कों पर BJP-NC आमने-सामने: सचिवालय घेरने निकली भाजपा, राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का प्रदर्शन

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और बिजली दरों को लेकर भाजपा ने उमर अब्दुल्ला सरकार को घेरा, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर भाजपा कार्यालय की ओर मार्च किया; शहर में भारी सुरक्षा व्यवस्था

न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली/जम्मू-कश्मीर | दैनिक भारतवर्ष

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर बुधवार को राजनीतिक प्रदर्शन के केंद्र में रही, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग विरोध प्रदर्शनों के साथ सड़कों पर उतर आईं। दोनों दलों के समानांतर कार्यक्रमों को देखते हुए प्रशासन ने श्रीनगर के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी और प्रमुख मार्गों पर पुलिस एवं सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।

भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सिविल सचिवालय की ओर मार्च का कार्यक्रम बनाया, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने सहित अपने राजनीतिक मुद्दों पर जवाबदेही की मांग करते हुए भाजपा कार्यालय की ओर प्रदर्शन का आह्वान किया।

लाल चौक से भाजपा का प्रदर्शन, सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना

भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक क्षेत्र में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने बेरोजगारी, कथित भ्रष्टाचार, बिजली दरों और शासन से जुड़े मुद्दों को लेकर उमर अब्दुल्ला सरकार पर सवाल उठाए।

भाजपा का कार्यक्रम लाल चौक के घंटाघर क्षेत्र से सिविल सचिवालय की ओर बढ़ने का था। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की और कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई।

भाजपा का आरोप है कि जम्मू-कश्मीर सरकार जनता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, विशेषकर युवाओं के रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था, पर अपेक्षित परिणाम देने में विफल रही है।

भाजपा कार्यालय की ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस का मार्च

भाजपा के विरोध प्रदर्शन के समानांतर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और कार्यकर्ता भी सड़क पर उतरे। पार्टी ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को प्रमुखता से उठाया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे को लेकर किए गए आश्वासनों पर स्पष्टता और कार्रवाई जरूरी है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की।

दोनों राजनीतिक दलों के प्रदर्शन कार्यक्रम अलग-अलग स्थानों पर आयोजित किए गए, लेकिन एक ही दिन और एक ही शहर में बड़े राजनीतिक विरोध कार्यक्रमों के कारण प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा, कई इलाकों में बैरिकेडिंग

श्रीनगर में लाल चौक, जवाहर नगर और आसपास के इलाकों में पुलिस तथा सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई। भाजपा कार्यालय की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई, जबकि दोनों दलों के प्रस्तावित मार्च मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।

प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक समूहों के समर्थकों के बीच किसी भी संभावित टकराव की स्थिति को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

आखिर किन मुद्दों पर आमने-सामने हैं BJP और NC?

श्रीनगर में दोनों दलों का प्रदर्शन अलग-अलग राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित रहा।

भाजपा के प्रमुख मुद्दे:

  • बेरोजगारी और युवाओं के लिए रोजगार
  • कथित भ्रष्टाचार
  • बिजली दरों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल
  • जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज को लेकर आलोचना

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख मुद्दे:

  • जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग
  • केंद्र सरकार से राजनीतिक आश्वासनों पर जवाबदेही
  • संवैधानिक और राजनीतिक अधिकारों से जुड़े सवाल

इस प्रकार श्रीनगर की सड़कों पर दिखाई दिया राजनीतिक टकराव केवल दो दलों के विरोध प्रदर्शनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जम्मू-कश्मीर की मौजूदा राजनीति में केंद्र और स्थानीय सरकारों के बीच जिम्मेदारी तथा राजनीतिक वादों को लेकर चल रही व्यापक बहस को भी सामने लाता है।

PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने दोनों दलों पर साधा निशाना

इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने BJP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच सड़क पर दिखाई दे रहे राजनीतिक टकराव पर सवाल उठाए। उन्होंने दोनों दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर अपनी अलग राजनीतिक टिप्पणी की और इसे लेकर निशाना साधा।

महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया के बाद श्रीनगर का यह राजनीतिक घटनाक्रम तीन प्रमुख दलों—BJP, नेशनल कॉन्फ्रेंस और PDP—के बीच आरोप-प्रत्यारोप की नई राजनीतिक बहस में भी बदल गया।

क्यों महत्वपूर्ण है श्रीनगर का यह राजनीतिक टकराव?

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राज्य का दर्जा, रोजगार, प्रशासनिक अधिकार और विकास से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। ऐसे समय में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी भाजपा का एक ही दिन सड़कों पर उतरना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भाजपा जहां जम्मू-कश्मीर सरकार के कामकाज को मुद्दा बना रही है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को राजनीतिक रूप से तेज कर रही है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों दलों के इस सड़क संघर्ष का असर जम्मू-कश्मीर की व्यापक राजनीतिक रणनीति और जनमत पर किस रूप में पड़ता है।

दैनिक भारतवर्ष की नजर में

श्रीनगर में बुधवार को BJP और नेशनल कॉन्फ्रेंस के समानांतर विरोध प्रदर्शनों ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में बढ़ती राजनीतिक तल्खी को स्पष्ट कर दिया। एक ओर भाजपा ने उमर अब्दुल्ला सरकार को रोजगार, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मुद्दों पर घेरा, तो दूसरी ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग के साथ केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।

भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुए इन प्रदर्शनों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा, रोजगार और शासन प्रमुख राजनीतिक मुद्दे बने रहेंगे।

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