1980 की मतदाता सूची में नाम शामिल होने के आरोप से जुड़े मामले में निचली अदालत का पुराना आदेश रद्द; शिकायतकर्ता और पुलिस का पक्ष सुनकर नया आदेश देने का निर्देश
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़े पुराने मतदाता सूची मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अदालत ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में कथित अनियमितता से संबंधित शिकायत पर FIR या जांच के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया गया था। अब मामले को निचली अदालत में नए सिरे से सुना जाएगा। अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह शिकायत सोनिया गांधी के नाम के 1980 की मतदाता सूची में शामिल होने से संबंधित है। शिकायतकर्ता अधिवक्ता विकास त्रिपाठी का दावा है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता वर्ष 1983 में प्राप्त की थी, जबकि उनका नाम इससे पहले 1980 की मतदाता सूची में दर्ज था।
शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि उस समय मतदाता सूची में नाम किस आधार और दस्तावेज के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने मामले में FIR दर्ज कर जांच की मांग की थी। हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हुए हैं।
पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने क्या किया था?
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में शिकायतकर्ता की उस मांग को स्वीकार नहीं किया था, जिसमें FIR दर्ज कराने और जांच की मांग की गई थी। इसके बाद शिकायतकर्ता विकास त्रिपाठी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सेशंस कोर्ट का रुख किया।
दिल्ली कोर्ट ने पुराने आदेश को क्यों रद्द किया?
21 सितंबर 2026 को विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने की अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने माना कि पुराने आदेश में पर्याप्त कारण नहीं दिए गए थे और संबंधित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं हुआ।
अदालत ने विशेष रूप से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) से जुड़ी प्रक्रिया का उल्लेख किया। अदालत के अनुसार संबंधित पुलिस अधिकारी की दलील सुनने और पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मंगाने जैसी प्रक्रिया पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया था।
अब आगे क्या होगा?
मामला वापस मजिस्ट्रेट अदालत को भेज दिया गया है। अदालत को शिकायतकर्ता और पुलिस का पक्ष सुनने के बाद कानून के अनुरूप कारणयुक्त आदेश पारित करना होगा।
मामले की अगली कार्यवाही 29 सितंबर 2026 को होनी है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं या FIR दर्ज हो चुकी है। फिलहाल अदालत ने केवल पहले के आदेश को रद्द करते हुए शिकायत पर नए सिरे से विचार का निर्देश दिया है।
सोनिया गांधी की ओर से क्या रुख रहा है?
इस मामले की पिछली कार्यवाही के दौरान सोनिया गांधी की ओर से शिकायत की वैधता और उसके आधार पर सवाल उठाए गए थे। अगस्त में अदालत में उनके पक्ष की ओर से यह भी कहा गया था कि शिकायत राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है। यह पक्ष शिकायत से संबंधित कार्यवाही का हिस्सा है; अदालत के मौजूदा आदेश का विषय मुख्य रूप से मजिस्ट्रेट द्वारा पहले पारित आदेश की कानूनी प्रक्रिया और उसके कारणों की समीक्षा था।
मतदाता सूची का मुद्दा क्यों चर्चा में है?
यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब दिल्ली की मतदाता सूचियों को लेकर भी व्यापक राजनीतिक बहस चल रही है। इसलिए सोनिया गांधी से संबंधित पुराने मतदाता सूची मामले में अदालत की ताजा कार्रवाई ने चुनावी सूची और उसके सत्यापन से जुड़े सवालों को फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, पुराने मामले और मौजूदा चुनावी सूची संबंधी प्रक्रियाओं को एक ही मामले के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
29 सितंबर पर रहेगी नजर
अब इस मामले में अगला महत्वपूर्ण चरण 29 सितंबर की सुनवाई होगी। उस दिन मजिस्ट्रेट अदालत शिकायतकर्ता की दलीलों, पुलिस के पक्ष और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया तय कर सकती है।
फिलहाल स्थिति स्पष्ट है—दिल्ली सेशंस कोर्ट ने पुराने आदेश को रद्द किया है, मामले को निचली अदालत में वापस भेजा है और नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिया है। आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है।
दैनिक भारतवर्ष — “व्यूज़ नहीं, न्यूज़ की बात”

















