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सरकारी स्कूलों में 28 जुलाई से शुरू होगा सोशल ऑडिट: ग्रामसभाओं को मिली कमान, बदलेंगे शिक्षा और व्यवस्था के समीकरण

दैनिक भारतवर्ष | रांची ब्यूरो | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

न्यूज़ डेस्क : रांची

झारखंड के सभी 24 जिलों में सरकारी और गैर-सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य सरकार एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। 28 जुलाई से प्रदेश के 3,500 से अधिक स्कूलों में समग्र शिक्षा और मध्याह्न भोजन (MDM) योजना का विस्तृत सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) शुरू हो रहा है।

इस बार की ऑडिट प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ग्रामसभा को मुख्य भूमिका सौंपी गई है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत बनाई गई इस रणनीति से ग्रामीण स्तर पर सीधे पारदर्शिता और मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

दो दिवसीय प्रक्रिया: ऐसे होगी पूरी जांच

पूर्व में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया केवल एक दिन में पूरी कर प्रखंड स्तर पर भेज दी जाती थी, लेकिन अब इसमें बड़ा बदलाव किया गया है:

  • पहला दिन (दस्तावेज व भौतिक निरीक्षण): ऑडिट टीम स्कूल के सभी रजिस्टरों, वित्तीय लेन-देन, बुनियादी सुविधाओं, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की गहन जांच करेगी। इसके साथ ही बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।

  • दूसरा दिन (ग्रामसभा के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करना): जांच में पाई गई किसी भी खामी या गड़बड़ी को सीधे ग्रामसभा की बैठक में रखा जाएगा। जब तक ग्रामसभा की स्वीकृति और अनुशंसा नहीं होगी, तब तक मामला आगे प्रखंडस्तरीय जनसुनवाई में नहीं भेजा जा सकेगा।

ज़मीनी धरातल से जन-सरोकार

ग्रामीणों और अभिभावकों की राय:

स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर अक्सर शिकायतें रहती थीं। अब ग्रामसभा को अधिकार मिलने से ग्रामीण अपनी बात खुलकर रख सकेंगे और सीधे तौर पर स्कूल प्रबंधन पर सकारात्मक दबाव बनेगा।

प्रशासनिक रुख:

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर नकेल कसेगी तथा योजनाओं का सीधा लाभ वास्तविक रूप से विद्यार्थियों तक पहुंचेगा।

दैनिक भारतवर्ष का विश्लेषण: कितना कारगर होगा यह कदम?

ग्राउंड रिपोर्ट से स्पष्ट है कि ग्रामसभा को मिले इस विकेंद्रीकृत अधिकार से ग्रामीण क्षेत्रों में लोकतंत्र और पंचायती राज व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। हालांकि, असली परीक्षा इस बात की होगी कि ग्रामसभा की अनुशंसित रिपोर्टों पर विभाग कितनी त्वरित और सख्त कार्रवाई करता है। यदि प्रक्रिया केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रही, तो यह कदम राज्य की प्राथमिक शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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