• HINDI NEWS
  • देश/राष्ट्रीय
  • SIR विवाद पर सियासत तेज: INDIA ब्लॉक की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति, चुनाव आयोग ने भी साफ किया अपना रुख
SIR विवाद और INDIA ब्लॉक

SIR विवाद पर सियासत तेज: INDIA ब्लॉक की बैठक में बनी आंदोलन की रणनीति, चुनाव आयोग ने भी साफ किया अपना रुख

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने, 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ मार्च का ऐलान

न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष

देश में मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद बुधवार को और तेज हो गया। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने दिल्ली में बैठक की। बैठक में SIR से जुड़े मुद्दों, मतदाता सूची में नामों के बदलाव और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि विपक्षी दल देशभर में आंदोलन और ‘Save Democracy’ मार्च आयोजित करेंगे। उनके अनुसार 2 से 8 अक्टूबर के बीच जिला स्तर पर कार्यक्रम किए जाएंगे, जबकि 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक मार्च करेंगे।

INDIA ब्लॉक की बैठक में क्या हुआ?

दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं और प्रतिनिधियों ने SIR तथा चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार किया। रिपोर्टों के अनुसार बैठक में 19 दल शामिल हुए। कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई नेता मौजूद रहे, जबकि विभिन्न सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।

बैठक का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण और उसके दौरान मतदाताओं के नामों को लेकर उठे सवाल रहे। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और मतदाताओं को पर्याप्त अवसर दिए जाने की मांग उठाई है।

2 से 8 अक्टूबर तक ‘Save Democracy’ मार्च

मल्लिकार्जुन खरगे के अनुसार INDIA ब्लॉक ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ मार्च आयोजित करने का फैसला किया है। इसके तहत युवाओं और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ने की बात कही गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि 6 अक्टूबर को विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च करेंगे। विपक्षी नेता अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन देने की तैयारी में भी हैं।

विपक्ष की मुख्य मांगें क्या हैं?

कांग्रेस और उसके सहयोगी दल SIR के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों से संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और अपील करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

कांग्रेस की ओर से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने, मतदाता सूची से जुड़े आंकड़ों को राजनीतिक दलों के लिए सरल प्रारूप में उपलब्ध कराने तथा गंभीर गड़बड़ियों की स्थिति में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग भी रखी गई है।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

विपक्ष के आरोपों के बीच चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों पर अपना पक्ष भी स्पष्ट किया है। आयोग ने कहा है कि SIR सहित उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर किसी तरह के मतभेद को लेकर सामने आई खबरों के संदर्भ में उसने अपने निर्णयों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया है।

आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। इसमें मृत मतदाताओं, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों तथा स्थान बदल चुके या सत्यापन में नहीं मिले मतदाताओं की पहचान जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। आयोग के अनुसार पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल होने और आपत्ति या अपील दर्ज कराने का अवसर उपलब्ध है।

SIR फॉर्म को लेकर चुनाव आयोग का नया कदम

30 सितंबर को चुनाव आयोग ने उन राज्यों में Form 6 से अतिरिक्त SIR घोषणा को हटाने का फैसला किया, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ऐसे राज्यों में नए मतदाता के पंजीकरण के लिए अब नियमित वैधानिक Form 6 ही भरना होगा।

हालांकि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी चल रही है, वहां अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था जारी रहेगी।

CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद क्यों बढ़ा?

SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। कांग्रेस ने उनके पद से हटाए जाने की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सरकार से जुड़े सूत्रों ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए SIR को कानूनी प्रक्रिया बताया है।

इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार याचिका में SIR से जुड़े कुछ फैसलों में बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग की भूमिका और CEC के अधिकारों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

चुनावी राजनीति पर क्या असर?

SIR का मुद्दा ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गया है जब अगले वर्ष कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। मतदाता सूची में नामों के सत्यापन और संशोधन की प्रक्रिया इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि किसी भी चुनाव में मतदान का अधिकार सीधे मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से जुड़ा होता है।

विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। दोनों पक्षों के इन अलग-अलग दावों के बीच अब अदालतों और चुनाव आयोग की आगे की कार्यवाही पर भी नजर रहेगी।

दैनिक भारतवर्ष — ‘व्यूज़ नहीं, न्यूज़ की बात’

शेयर करें :

यह भी पढ़ें

भारतीय नौसेना का स्वदेशी पनडुब्बी-रोधी युद्धपोत INS मंगरोल

भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ी: स्वदेशी युद्धपोत INS मंगरोल बेड़े में शामिल, 80% से अधिक तकनीक देश में विकसित

मुंबई में 12 अक्टूबर को हुआ कमीशनिंग समारोह; दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, तटीय निगरानी और समुद्री…

मतदाता सूची के SIR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करते राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के नेता

मतदाता सूची विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं ने दाखिल की याचिका

SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर उठाए सवाल; विपक्ष ने चुनाव आयोग के फैसलों की…

दिल्ली में जंतर-मंतर के स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड नए प्रदर्शन स्थल निर्धारित

जंतर-मंतर पर अब नहीं होंगे प्रदर्शन! दिल्ली पुलिस ने तय किए तीन नए स्थल

गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के बाद 11 अक्टूबर के आदेश से बदली व्यवस्था; रामलीला मैदान, बुराड़ी…

सासाराम समाहरणालय के समक्ष छात्राओं से जुड़े मामले को लेकर भाजपा रोहतास का विरोध प्रदर्शन

छात्राओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के आरोपों पर सासाराम में भाजपा का प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद पर कार्रवाई की मांग

रोहतास भाजपा ने समाहरणालय के समक्ष जताया विरोध; जिला अध्यक्ष संतोष पटेल के नेतृत्व में जुटे पार्टी पदाधिकारी…

dainik_bharatvarsh_ad_1920x300

Scroll to Top