श्रावण की अंतिम सोमवारी पर बक्सर के रामरेखा घाट से लाए गंगाजल से निकली भव्य यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने की सहभागिता
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
तिलौथू: श्रावण मास की अंतिम सोमवारी के अवसर पर तिलौथू प्रखंड के सरैया गांव में आस्था, परंपरा और सामूहिक भक्ति का अनूठा दृश्य देखने को मिला। गांव में आयोजित विशेष गंगा जलार्पण यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। हर-हर महादेव, बोल बम और जय मां गंगे के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।
इस विशेष यात्रा के लिए बक्सर के ऐतिहासिक रामरेखा घाट से पवित्र गंगाजल लाया गया था। विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ गंगा आरती के बाद श्रद्धालुओं के जलपात्रों में गंगाजल वितरित किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था सरैया गांव के अलग-अलग धार्मिक स्थलों की ओर रवाना हुआ।

शिव मंदिर से शुरू हुई गंगा जलार्पण यात्रा
यात्रा की शुरुआत गांव के छठ घाट से हुई। श्रद्धालु सबसे पहले शिव मंदिर पहुंचे, जहां बाबा भोलेनाथ का गंगाजल से जलाभिषेक किया गया। इसके बाद यात्रा गांव के पारंपरिक रास्तों से होती हुई अति प्राचीन राधे-कृष्ण मंदिर पहुंची। यहां मंदिर परिसर में स्थित शिवलिंग पर भी श्रद्धालुओं ने गंगाजल अर्पित किया और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
इंद्रासन देवी को भी अर्पित किया गंगाजल
यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव गांव का मुख्य चौक रहा। यहां ग्रामीणों की आराध्य इंद्रासन देवी को गंगाजल से सिंचित किया गया। आयोजन से जुड़ी स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस परंपरा का संबंध आने वाले व्रत-त्योहारों में श्रद्धालुओं के लिए पवित्र जल उपलब्ध कराने से भी है।
इसके बाद श्रद्धालुओं का जत्था गांव की पश्चिम दिशा में स्थित बाबा भोलेनाथ के मंदिर पहुंचा। वहां विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया गया।

थाना परिसर स्थित शिव मंदिर में भी हुआ अभिषेक
गंगा जलार्पण यात्रा आगे संत रविदास मार्ग से होते हुए एनएच-2 के रास्ते तिलौथू थाना परिसर स्थित बाबा भोलेनाथ के मंदिर पहुंची। यहां भी श्रद्धालुओं ने गंगाजल अर्पित कर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की।
पूरी यात्रा के दौरान महिलाओं, युवतियों और अन्य श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। पारंपरिक परिधानों में शामिल महिलाएं भक्ति गीतों और जयघोष के बीच यात्रा में आगे बढ़ती रहीं। विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं का स्वागत भी किया।
धार्मिक आस्था के साथ दिखी सामाजिक समरसता
सरैया की गलियों से होकर गुजरी यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें ग्रामीण संस्कृति और सामूहिक सहभागिता की झलक भी दिखाई दी। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने गांव की पुरानी धार्मिक परंपराओं और सामूहिक आस्था को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
यात्रा के समापन पर दुर्गा मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही गंगा जलार्पण यात्रा का विधिवत समापन हुआ।
परंपरा को नई पहचान देने वाला आयोजन
सरैया में आयोजित इस गंगा जलार्पण यात्रा ने श्रावण की अंतिम सोमवारी को धार्मिक उत्सव के साथ-साथ सामुदायिक एकजुटता का अवसर भी बना दिया। गांव के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर गंगाजल अर्पित किए जाने की इस परंपरा ने स्थानीय धार्मिक विरासत को विशेष पहचान दी। आयोजन के दौरान देर तक पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव, बोल बम और जय मां गंगे के जयघोष से गूंजता रहा।
















