JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद भाजपा का झारखंड बंद; पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14वीं JPSC समेत अन्य परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया।
न्यूज़ डेस्क : रांची | दैनिक भारतवर्ष (विशेष रिपोर्ट)
रांची: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक के आरोपों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों और सरकार के बीच गतिरोध बना हुआ है। 10 अगस्त को रांची में विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव तथा लाठीचार्ज के बाद विवाद और गहरा गया।
विधानसभा घेराव के दौरान क्या हुआ?
छात्र संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा घेराव के लिए आगे बढ़े थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि प्रदर्शन के दौरान पथराव में चार पुलिसकर्मी घायल हुए। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्रों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने का आरोप लगाया।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार शामिल हैं। छात्र संगठनों का एक वर्ग JSSC-CGL परीक्षा की भी जांच अथवा रद्द करने की मांग कर रहा है।
भाजपा ने बुलाया झारखंड बंद
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में भाजपा ने 11 अगस्त को राज्यव्यापी झारखंड बंद का आह्वान किया। भाजपा नेताओं ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया और भर्ती परीक्षाओं के विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग की। बंद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया, जबकि रांची में कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई। बंद का असर हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में अलग रहा।
भाजपा का कहना है कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और कथित परीक्षा अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, सरकार का पक्ष है कि वह छात्रों की शिकायतों पर कार्रवाई कर रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास जारी है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार
विवाद के बीच झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई। गिरफ्तारी को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं होती; मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
परीक्षा विवाद के बीच JPSC के सदस्यों के इस्तीफे की खबरों ने भी मामले को और गंभीर राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।
हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला
विवाद के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा में 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की। रिपोर्टों के अनुसार सरकार ने दो अन्य JPSC परीक्षाओं को भी रद्द करने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने हाल की परीक्षा प्रक्रियाओं से जुड़े निजी विक्रेता TDPL की भूमिका की जांच की बात भी कही है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है: 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की घोषणा और JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग एक ही बात नहीं है। JSSC-CGL को लेकर छात्रों की मांग अलग है और सरकार की ओर से इस परीक्षा को रद्द करने की कानूनी स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकार के मंत्री ने पहले कहा था कि JSSC-CGL परीक्षा अदालत के निर्देशों के तहत आयोजित हुई थी, इसलिए इसे राज्य सरकार अपने स्तर पर सीधे रद्द नहीं कर सकती।
CBI जांच की मांग पर भी कायम छात्र
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का एक प्रमुख मुद्दा कथित अनियमितताओं की जांच CBI से कराने का है। सरकार के साथ बातचीत के कई दौर के बावजूद छात्र आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो की लंबी भूख हड़ताल के बाद तबीयत बिगड़ने की खबर भी सामने आई थी।
छात्रों का तर्क है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्षता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई कर रही है।
अब आगे क्या?
JPSC-JSSC विवाद ने झारखंड में युवाओं, सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव को तेज कर दिया है। एक तरफ सरकार परीक्षा रद्द करने और जांच की दिशा में कदम उठाने का दावा कर रही है, वहीं आंदोलनकारी छात्र CBI जांच सहित अपनी बाकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। भाजपा भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार के नए फैसलों से छात्र आंदोलन खत्म होगा या JPSC-JSSC विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा? इसका जवाब आंदोलनकारी संगठनों और सरकार के बीच होने वाली अगली बातचीत तथा जांच की प्रगति से स्पष्ट होगा।















