मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर CJP का प्रदर्शन; दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी, जनपथ और कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, पुणे से दिल्ली आ रहे छात्र इटारसी में रोके गए
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच शनिवार को दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उससे जुड़े संगठनों के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कई स्थानों पर लोगों को हिरासत में लिया। गुरुग्राम में यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, पुणे से दिल्ली आ रहे कम-से-कम 14 छात्रों को मध्य प्रदेश के इटारसी में रेलवे पुलिस ने हिरासत में लिया।
प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। दूसरी ओर, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली की सीमाओं, प्रमुख सड़कों, रेलवे स्टेशनों और जंतर-मंतर की ओर जाने वाले मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी में बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई तथा मेट्रो और रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा।
10 अक्टूबर की सुबह लगभग 10 बजे तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई थी। इस समय तक प्रदर्शन के अंतिम स्वरूप, कुल प्रतिभागियों और सभी हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति का पूर्ण आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया था।
ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित आवास से हिरासत में लिया गया
जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सामने आई प्रमुख घटनाओं में यूट्यूबर ध्रुव राठी की हिरासत शामिल है। हिंदुस्तान टाइम्स की 10 अक्टूबर की लाइव रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुग्राम पुलिस ने ध्रुव राठी को सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार सोसाइटी के उनके आवास से हिरासत में लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस की टीम उनके आवास पर पहुंची थी और अधिकारियों ने उनसे प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली नहीं जाने को कहा था। पुलिस ने बताया कि निर्देशों का पालन नहीं करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में ध्रुव राठी के खिलाफ किसी औपचारिक गिरफ्तारी, दर्ज प्राथमिकी या न्यायालय में पेश किए जाने की पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए इस कार्रवाई को फिलहाल हिरासत के रूप में ही रिपोर्ट करना उचित है।
जनपथ और कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शनकारी हिरासत में
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह जनपथ और कनॉट प्लेस इलाके के आसपास कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। पुलिस को निर्देश दिए गए थे कि प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन करने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने सुबह 9:07 बजे के अपडेट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि दिल्ली के विभिन्न हिस्सों से कम-से-कम 600 लोगों को हिरासत में लिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कार्रवाइयों के दौरान दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई।
इससे पहले हिंदुस्तान टाइम्स की लाइव रिपोर्ट में रातभर में 1,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी गई थी। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग समय पर प्रकाशित रिपोर्टों से हैं। पुलिस की ओर से सभी हिरासतों का एकीकृत और अंतिम आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने के कारण इन्हें जोड़कर कुल संख्या निकालना उचित नहीं होगा।
यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि हिरासत में लिए गए प्रत्येक व्यक्ति की औपचारिक गिरफ्तारी हुई हो, ऐसा उपलब्ध जानकारी से साबित नहीं होता।
पुणे से दिल्ली आ रहे 14 छात्र इटारसी में हिरासत में
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन का असर दूसरे राज्यों से आने वाले प्रदर्शनकारियों पर भी पड़ा। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुणे से दिल्ली जा रहे कम-से-कम 14 छात्रों को मध्य प्रदेश के इटारसी में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने हिरासत में लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ये छात्र ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), न्यू स्टूडेंट्स एंड यूथ फेडरेशन (NSYF) और रेजिस्ट, रिक्लेम, रीबिल्ड (RRR) अभियान से जुड़े थे। छात्रों को गोवा एक्सप्रेस से उतारे जाने की सूचना दी गई। बताया गया कि सोशल मीडिया पर उनकी यात्रा से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद पुलिस ने उनकी पहचान की।
इस कार्रवाई के बाद छात्रों के परिवारों और कानूनी प्रतिनिधियों की ओर से चिंता जताई गई। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई। अदालत ने अधिकारियों को 13 अक्टूबर तक छात्रों को पेश करने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
इस मामले में छात्रों को हिरासत में लिए जाने और उनकी यात्रा रोके जाने की जानकारी रिपोर्ट में है। हालांकि, सभी छात्रों की बाद की स्थिति तथा उनकी रिहाई के बारे में सुबह तक एक समान आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं था।
पोस्टर बांटने के आरोप में एक व्यक्ति को पहले भी हिरासत में लिया गया
प्रदर्शन से संबंधित कार्रवाई 10 अक्टूबर से पहले ही शुरू हो गई थी। इंडियन एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दक्षिण दिल्ली में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया था। आरोप था कि वह जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने की अपील वाले पोस्टर बांट रहा था।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक कॉलेज के बाहर पर्चे बांटने वाले लोगों के बारे में सूचना मिलने पर पुलिस की विशेष इकाई मौके पर पहुंची। वहां एक व्यक्ति के पास पोस्टर और पर्चे मिलने के बाद उसे पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया।
पुलिस पोस्टरों की छपाई और वितरण से जुड़े व्यापक नेटवर्क की भी जांच कर रही थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उस व्यक्ति की पहचान, उसके खिलाफ दर्ज मामले या बाद की कानूनी स्थिति का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया।
CJP के प्रवक्ता दीपक बलियान भी हिरासत में लिए गए थे
प्रदर्शन से पहले CJP ने देश के विभिन्न हिस्सों में अपने सदस्यों और समर्थकों को हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया था। टाइम्स ऑफ इंडिया की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन के प्रवक्ता अशुतोष रांका ने दावा किया कि देशभर में CJP, छात्र संगठनों और अन्य समूहों से जुड़े कम-से-कम 10,000 लोगों को हिरासत में लिया गया।
यह संख्या संगठन का दावा है, कोई सत्यापित अखिल भारतीय पुलिस आंकड़ा नहीं। इसे आधिकारिक रूप से पुष्टि की गई कुल गिरफ्तारी या हिरासत संख्या के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
इसी रिपोर्ट के मुताबिक, CJP ने बताया कि उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक बलियान को 8 अक्टूबर को पुलिस हिरासत में लिया गया था और उसी रात छोड़ दिया गया। इस प्रकार, उनके मामले में हिरासत और बाद में रिहाई की जानकारी संगठन के हवाले से सामने आई।
CJP और कुछ अन्य संगठनों ने इन कार्रवाइयों को प्रदर्शन रोकने का प्रयास बताया। दूसरी ओर, पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कदम उठाने की बात कही।
अभिजीत दीपके का ऐलान—हिरासत या जेल से आंदोलन नहीं रुकेगा
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद पीछे हटने से इनकार किया। 10 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, वह मुंबई से दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले थे।
दीपके ने कहा कि संगठन मतदाता सूची से कथित रूप से नाम हटाए जाने के मुद्दे को उठाता रहेगा। उन्होंने गिरफ्तारी या जेल जाने की स्थिति में भी आंदोलन जारी रखने की बात कही और समर्थकों से शांतिपूर्ण रहने की अपील की।
CJP की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
- मतदाता सूची के SIR की प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग।
- कथित चुनावी अनियमितताओं की जवाबदेही तय करना।
- चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया।
इन मांगों के पीछे संगठन का तर्क है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। हालांकि, आरोपों की सत्यता पर अंतिम निष्कर्ष के लिए आधिकारिक आंकड़ों और जांच संबंधी दस्तावेजों की आवश्यकता है।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, आवेदन 7 अक्टूबर को दिया गया, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कम-से-कम 10 दिन पहले आवेदन किया जाना चाहिए।
पुलिस ने CJP के पिछले जून-जुलाई के आंदोलन के दौरान निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किए जाने के आरोपों का भी हवाला दिया। अधिकारियों ने संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी समस्या, यातायात बाधित होने और संवेदनशील सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने पुलिस के तर्क पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि प्रशासन को प्रदर्शन की योजना के बारे में पहले से जानकारी थी और शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है।
इस तरह विवाद के दो स्पष्ट पक्ष हैं—एक ओर प्रदर्शन आयोजक इसे शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार बताते हैं, जबकि दूसरी ओर पुलिस ने समय पर आवेदन नहीं मिलने, पूर्व के आयोजनों में कथित नियम उल्लंघन और सुरक्षा संबंधी आशंकाओं का हवाला दिया है।
दिल्ली में 35 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की खबर
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस और अन्य समाचार रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों के 35,000 से अधिक जवानों की तैनाती की सूचना दी गई थी। कुछ लाइव रिपोर्टों में कुल तैनाती का अनुमान इससे भी अधिक बताया गया।
दिल्ली की सीमाओं पर जांच, प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग और केंद्रीय दिल्ली में अतिरिक्त निगरानी की व्यवस्था की गई। पुलिस ने लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन और अन्य निगरानी साधनों के इस्तेमाल की भी तैयारी की।
रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को जरूरत पड़ने पर रखने के लिए शहर के छह स्थानों को निर्धारित किया गया था। इनमें छत्रसाल स्टेडियम, राजीव गांधी स्टेडियम, यमुना स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और सूरजमल स्टेडियम सहित कुछ सामुदायिक केंद्र शामिल थे।
इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य प्रस्तावित भीड़ को प्रतिबंधित क्षेत्र में एकत्र होने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया।
45 मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो की सेवाओं पर भी असर पड़ा। पहले 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद रखने की योजना बताई गई थी, लेकिन बाद में प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई।
इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, नई दिल्ली, पटेल चौक, मंडी हाउस, जनपथ, सुप्रीम कोर्ट और आईटीओ जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल बताए गए। कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखने की जानकारी दी गई थी, जबकि नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन के लिए अलग व्यवस्था थी।
इसके अतिरिक्त, जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक निलंबित करने का आदेश दिया गया था।
यात्रियों को सलाह दी गई कि वे घर से निकलने से पहले दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक सूचना और अपने यात्रा मार्ग की स्थिति जांच लें।
250 से अधिक ट्रेनें रद्द होने की रिपोर्ट
सुरक्षा व्यवस्था और संभावित यातायात बाधाओं के कारण रेल यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। टाइम्स ऑफ इंडिया की 10 अक्टूबर की लाइव रिपोर्ट में 250 से अधिक ट्रेनों के रद्द होने की जानकारी दी गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इनमें लगभग 179 स्थानीय सेवाएं और 75 से अधिक लंबी दूरी की मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल थीं। नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से आने-जाने वाली सेवाओं पर विशेष असर पड़ने की बात कही गई।
मैगध एक्सप्रेस, तेजस राजधानी, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, शताब्दी, प्रयागराज एक्सप्रेस और हमसफर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों के प्रभावित होने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई।
हालांकि, किसी यात्री की विशेष ट्रेन रद्द हुई है या उसका समय बदला गया है, इसकी पुष्टि रेलवे की आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए। सभी रेल सेवाओं को बंद कर दिए जाने का दावा सही नहीं होगा।
SIR विवाद के केंद्र में क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच, सुधार और अद्यतन करना है। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच विवाद सामने आया है।
CJP का आरोप है कि पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। संगठन ने लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया है। इस आंकड़े और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग ने कथित हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का पक्ष है कि SIR से जुड़े प्रमुख निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने भी मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों को खारिज किया है।
इसलिए पूरे विवाद को समझने के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची में बदलाव की संख्या, उन बदलावों के कारण और किसी कथित अनियमितता के प्रमाण अलग-अलग सवाल हैं। किसी आरोप को अपने आप प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
अब तक की घटनाओं का क्रम
- 8 अक्टूबर: दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर जंतर-मंतर प्रदर्शन के पोस्टर बांटने वाले एक व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। CJP के अनुसार, प्रवक्ता दीपक बलियान को भी हिरासत में लेकर बाद में छोड़ दिया गया।
- 9 अक्टूबर: दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने का निर्णय सार्वजनिक किया। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और मेट्रो, रेल तथा मोबाइल इंटरनेट पर प्रतिबंधों की घोषणा हुई।
- 9 अक्टूबर: CJP के प्रवक्ता ने देशभर में 10,000 लोगों को हिरासत में लिए जाने का दावा किया। यह संगठन का दावा है, आधिकारिक रूप से सत्यापित कुल संख्या नहीं।
- 10 अक्टूबर की सुबह: जनपथ और कनॉट प्लेस के आसपास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर आई। टाइम्स ऑफ इंडिया ने सुबह 9:07 बजे तक दिल्ली में कम-से-कम 600 लोगों को हिरासत में लिए जाने की सूचना दी।
- 10 अक्टूबर की सुबह: गुरुग्राम पुलिस ने यूट्यूबर ध्रुव राठी को उनके आवास से हिरासत में लिया। वहीं, पुणे से दिल्ली आ रहे कम-से-कम 14 छात्रों को इटारसी में रेलवे पुलिस ने हिरासत में लिया।
- 10 अक्टूबर, सुबह लगभग 10 बजे तक: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन का नेतृत्व करने की तैयारी की खबर थी। इस समय तक प्रदर्शन के अंतिम स्वरूप और सभी हिरासत में लिए गए लोगों की स्थिति का पूर्ण आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया था।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित SIR विरोध-प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की एहतियाती कार्रवाई और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंध प्रमुख घटनाक्रम रहे। ध्रुव राठी की हिरासत, जनपथ और कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों को रोके जाने तथा इटारसी में छात्रों की हिरासत ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया।
फिलहाल इस खबर में सबसे जरूरी तथ्य यह है कि विभिन्न रिपोर्टों में हिरासत के अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं, लेकिन सभी लोगों की पहचान, गिरफ्तारी की औपचारिक स्थिति और रिहाई का एकीकृत सरकारी विवरण उपलब्ध नहीं है। इसी तरह, प्रदर्शन की वास्तविक भीड़ और उसके अंतिम परिणाम की पुष्टि बाद के अपडेट से ही की जा सकती है।
दैनिक भारतवर्ष का पक्ष: मतदाता सूची की पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े सवालों पर निष्पक्ष जानकारी जरूरी है। साथ ही, पुलिस की ओर से बताए गए सुरक्षा कारणों और निर्वाचन आयोग के जवाब को भी पाठकों के सामने रखना आवश्यक है, ताकि आरोप और प्रमाण के बीच अंतर स्पष्ट रहे।
















