रिकॉर्ड ऊंचाई छू चुकी चीनी की कीमतों को लेकर केंद्र सतर्क, 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति; मिलों से उचित कीमत पर बिक्री सुनिश्चित करने को कहा
न्यूज़ डेस्क : नई दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष
देश में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों में दोबारा तेजी न आए, इसके लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों और उद्योग से पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने तथा उचित कीमत पर बिक्री सुनिश्चित करने को कहा है। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब पिछले महीने घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन वे करीब दो महीने पहले की तुलना में अभी भी लगभग 20 प्रतिशत अधिक बताई जा रही हैं।
खाद्य मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, सरकार ने चीनी क्षेत्र से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि आगामी त्योहारों के दौरान बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध रहे। मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया है कि यदि कीमतों में अनावश्यक बढ़ोतरी होती है तो उन्हें नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
क्यों बढ़ी चीनी की कीमत?
सरकार के अनुसार हालिया तेजी का कारण केवल मांग में बढ़ोतरी नहीं माना जा रहा है। खाद्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने कहा कि कीमतों में उछाल के पीछे भविष्य में और तेजी की आशंका के बीच जमाखोरी भी एक वजह रही है। सरकार ने चीनी उद्योग से बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने को कहा है।
त्योहारी महीनों में चीनी की मांग आम तौर पर बढ़ जाती है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की खपत बढ़ने से चीनी की मांग पर भी दबाव आता है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में आपूर्ति की कमी न हो।
10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति
घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह व्यवस्था टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत की गई है। सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाना और कीमतों को नियंत्रित रखना है।
10 सितंबर तक सरकार को इस कोटे के तहत करीब 8 लाख मीट्रिक टन चीनी के आयात के लिए आवेदन मिल चुके हैं। भारत आम तौर पर चीनी का बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आयात का रास्ता अपनाया गया है।
ब्राजील से भी हो रहा चीनी आयात
इस घटनाक्रम की एक खास बात यह है कि भारत करीब एक दशक बाद ब्राजील से चीनी आयात कर रहा है। घरेलू बाजार में कीमतों पर नियंत्रण और त्योहारी सीजन में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक बाजार से आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि घरेलू कीमतों में हालिया गिरावट के कारण आयातकों के लिए विदेश से चीनी मंगाना पहले की तुलना में कम आकर्षक हो गया है। बाजार भाव में गिरावट के कारण आयातित चीनी की लागत घरेलू आपूर्ति के मुकाबले ज्यादा पड़ने की स्थिति भी बन रही है।
रिफाइनरियां घरेलू बाजार में बेचेंगी चीनी
सरकार के आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के बीच बंदरगाह आधारित चीनी रिफाइनरियों से करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आने की संभावना है। इससे त्योहारी सीजन के दौरान उपलब्धता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा सरकार ने चीनी मिलों को आगामी सीजन में उत्पादन प्रक्रिया जल्दी शुरू करने के लिए भी कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार नई सीजन की आपूर्ति समय पर बाजार में पहुंचाने के लिए मिलों को 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा गया है, जो सामान्य समय से करीब एक महीने पहले है।
सरकार रखेगी उत्पादन और बिक्री पर नजर
केंद्र सरकार अब चीनी के उत्पादन और बिक्री के आंकड़ों की मासिक निगरानी को भी अधिक व्यवस्थित करने की तैयारी में है। खाद्य मंत्रालय ने मिलों से उत्पादन और बिक्री से संबंधित सटीक मासिक आंकड़े उपलब्ध कराने को कहा है। इसका उद्देश्य बाजार की वास्तविक स्थिति को समझना और जरूरत पड़ने पर समय रहते नीतिगत फैसला लेना है।
आम लोगों के लिए क्या मायने?
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की कीमत में होने वाला बदलाव सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर सकता है। सरकार की ओर से अतिरिक्त आयात, घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और जमाखोरी पर नजर रखने जैसे कदमों का मुख्य उद्देश्य यही है कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद चीनी की कीमतों में अचानक उछाल न आए।
फिलहाल बाजार में कीमतों में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन पिछले दो महीनों के मुकाबले चीनी अभी भी महंगी है। ऐसे में आने वाले सप्ताहों में घरेलू उत्पादन, आयात और त्योहारी मांग के बीच संतुलन यह तय करेगा कि उपभोक्ताओं को चीनी की कीमतों में और राहत मिलती है या नहीं।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
सरकार का ताजा संदेश साफ है कि त्योहारी मांग बढ़ने के दौरान चीनी की कृत्रिम कमी या अनावश्यक मूल्य वृद्धि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आयात और घरेलू आपूर्ति बढ़ने के बाद खुदरा बाजार में इसका वास्तविक असर कितनी जल्दी दिखाई देता है।


















