डीजल-LNG डुअल फ्यूल तकनीक से चलेगी ट्रेन, 8 कोच की गैर-वातानुकूलित ट्रेन का उद्घाटन रन साबरमती से मेहसाणा के बीच
न्यूज़ डेस्क : अहमदाबाद | दैनिक भारतवर्ष
भारतीय रेलवे ने वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए देश की पहली LNG-डीजल डुअल फ्यूल ट्रेन को आज पटरी पर उतार दिया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे।
यह ट्रेन पूरी तरह केवल LNG पर निर्भर नहीं है। इसमें डीजल और LNG दोनों ईंधनों का इस्तेमाल करने वाली डुअल-फ्यूल तकनीक लगाई गई है। रेलवे के मुताबिक इसका उद्देश्य डीजल की खपत कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
साबरमती से मेहसाणा के बीच हुआ उद्घाटन रन
पहले चरण में देश की पहली LNG-डीजल डुअल फ्यूल DEMU ट्रेन का उद्घाटन रन साबरमती से मेहसाणा जंक्शन के बीच हुआ। यह दूरी करीब 62 किलोमीटर है और ट्रेन को यह दूरी लगभग 1 घंटे 20 मिनट में तय करने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान ट्रेन झुलासन, डांगरवा, अंबलियासन और जगुदण जैसे स्टेशनों से होकर गुजरेगी।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार उद्घाटन रन के लिए यह मार्ग तय किया गया है, जबकि ट्रेन का आगे का नियमित परिचालन रूट बाद में अंतिम रूप से घोषित किया जाएगा।
8 कोच की है ट्रेन
देश की पहली LNG ट्रेन में 8 कोच हैं और यह नॉन-एसी चेयर कार ट्रेन है। इसकी सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका डुअल-फ्यूल सिस्टम है, जिसके कारण इंजन LNG और डीजल दोनों पर चल सकता है। ईंधन की उपलब्धता के अनुसार सिस्टम को दोनों ईंधनों के बीच इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस परियोजना के लिए साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो की दो 1,400 हॉर्सपावर की Driving Power Cars (DPCs) को LNG-डीजल डुअल फ्यूल सिस्टम में परिवर्तित किया गया है।
2,000 किलोमीटर से ज्यादा हुआ परीक्षण
ट्रेन को यात्रियों के लिए उतारने से पहले इसके डुअल-फ्यूल सिस्टम का व्यापक परीक्षण किया गया। परिवर्तित किए गए DPCs ने 2,000 किलोमीटर से अधिक का फील्ड ट्रायल पूरा किया। इन परीक्षणों का उद्देश्य LNG आधारित तकनीक की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता को जांचना था।
रेलवे को कितनी बचत की उम्मीद?
रेलवे के अनुमान के मुताबिक LNG के इस्तेमाल से डीजल की खपत कम होने के साथ ईंधन खर्च में भी कमी आ सकती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक DPC से करीब ₹11.9 लाख सालाना बचत का अनुमान है। दो DPC वाली 8-कोच की पूरी रेक के लिए अनुमानित सालाना बचत करीब ₹23.9 लाख बताई गई है।
हालांकि, यह आंकड़ा रेलवे का अनुमान है। वास्तविक बचत ट्रेन के परिचालन, ईंधन की कीमत, LNG की उपलब्धता और अन्य परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
डीजल पर निर्भरता कम करने की कोशिश
भारतीय रेलवे लंबे समय से अपने परिचालन में वैकल्पिक और कम प्रदूषण वाले ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। LNG ट्रेन इसी प्रयास का हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य LNG के इस्तेमाल के जरिए डीजल की खपत और उससे जुड़े उत्सर्जन को कम करना है।
LNG के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद जताई गई है। हालांकि वास्तविक पर्यावरणीय लाभ का आकलन लंबे समय के परिचालन आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
रेलवे के लिए एक और वैकल्पिक ईंधन विकल्प
भारतीय रेलवे ने इससे पहले हाइड्रोजन आधारित ट्रेन की शुरुआत भी की है। अब LNG-डीजल डुअल फ्यूल ट्रेन का परिचालन शुरू होने से रेलवे के पास वैकल्पिक ईंधन आधारित तकनीक का एक और विकल्प जुड़ गया है।
LNG ट्रेन की खासियत यह है कि इसमें मौजूदा डीजल व्यवस्था को पूरी तरह हटाने के बजाय डुअल-फ्यूल प्रणाली अपनाई गई है। इससे LNG उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में डीजल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
₹1,500 करोड़ से ज्यादा की रेल परियोजनाओं का भी शुभारंभ
साबरमती में आयोजित कार्यक्रम के दौरान केवल LNG ट्रेन ही नहीं, बल्कि गुजरात में रेलवे से जुड़ी कई अन्य परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शुभारंभ किया गया। अलग-अलग सरकारी और मीडिया रिपोर्टों में परियोजनाओं की कुल राशि ₹1,472 करोड़ से अधिक से लेकर ₹1,542 करोड़ से अधिक बताई गई है; यह अंतर परियोजनाओं की अलग-अलग गणना के कारण रिपोर्टों में दिखाई देता है।
इन परियोजनाओं में WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग, कवच ट्रेन सुरक्षा प्रणाली और साबरमती-सारखेज रेल लाइन के दोहरीकरण से जुड़े काम शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल LNG ट्रेन का उद्घाटन रन साबरमती–मेहसाणा मार्ग पर हुआ है। इसके बाद इसके नियमित परिचालन और अंतिम रूट को लेकर रेलवे की ओर से आगे जानकारी दी जाएगी। इस परियोजना का वास्तविक प्रभाव ईंधन बचत, परिचालन लागत और उत्सर्जन में कमी के आंकड़ों से स्पष्ट होगा।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
भारत की पहली LNG-डीजल डुअल फ्यूल ट्रेन का शुरू होना रेलवे में वैकल्पिक ईंधन तकनीक के विस्तार की दिशा में एक नया कदम है। अभी इसका शुरुआती परिचालन चरण है, इसलिए इसकी वास्तविक आर्थिक और पर्यावरणीय उपयोगिता लंबे समय के प्रदर्शन आंकड़ों से ज्यादा स्पष्ट होगी।



















