मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर बढ़ा विवाद; जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले रेल और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों की खबर, चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण प्रक्रिया को बताया अधूरा
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति में विवाद तेज हो गया है। दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों की खबरें सामने आई हैं। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारी समूहों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है और जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें नाम जुड़वाने का अवसर उपलब्ध है।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। प्रदर्शन के आयोजकों और प्रशासन के बीच अनुमति तथा कानून-व्यवस्था को लेकर भी विवाद सामने आया है।
क्या है SIR और क्यों उठ रहे सवाल?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और उसमें आवश्यक सुधार करना है। इस प्रक्रिया के दौरान नामों को लेकर विवाद तब बढ़ा, जब बड़ी संख्या में मतदाता प्रविष्टियों को हटाने या उनकी दोबारा जांच किए जाने के आंकड़े चर्चा में आए।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाता नामों को हटाए जाने या जांच के दायरे में आने को लेकर विवाद है। हालांकि, इस आंकड़े को अंतिम रूप से हटाए गए 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नामों के बराबर मानना सही नहीं होगा। चुनाव आयोग के पक्ष के मुताबिक, संबंधित आंकड़े पुनरीक्षण के मसौदा चरण से जुड़े हैं और प्रक्रिया अभी जारी है।
विपक्षी दलों और आलोचकों का आरोप है कि इस प्रक्रिया से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी
दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े युवा आंदोलन ने की है। इसके नेता अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि आयोजकों को प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिली है। ऐसे में निर्धारित नियमों का उल्लंघन होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रदर्शन के आयोजकों ने रास्ते में समर्थकों को हिरासत में लिए जाने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि रॉयटर्स तत्काल नहीं कर सका। इसलिए हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या और उससे जुड़े आरोपों को अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ी, रेल और मेट्रो सेवाओं पर असर
प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की जानकारी सामने आई है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे ने 10 अक्टूबर के लिए नई दिल्ली के दो स्टेशनों से संबंधित कई ट्रेन सेवाएं रद्द करने की सूचना दी है। दिल्ली मेट्रो की सेवाओं और कुछ स्टेशनों के प्रवेश-निकास पर भी प्रतिबंधों की खबरें हैं।
इन व्यवस्थाओं से यात्रियों को असुविधा हो सकती है। हालांकि, यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा से पहले रेलवे और दिल्ली मेट्रो की आधिकारिक सूचनाओं से अपनी ट्रेन, स्टेशन और मार्ग की स्थिति की पुष्टि कर लें।
विपक्ष की मांग और चुनाव आयोग का पक्ष
मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए और पात्र मतदाताओं के नाम हटने की आशंकाओं का समाधान होना चाहिए। विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं।
इसके विपरीत, चुनाव आयोग का पक्ष है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया अभी अधूरी है और मसौदा सूची में सामने आए आंकड़ों को अंतिम स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। पात्र मतदाताओं के लिए नाम दर्ज कराने या छूटी हुई प्रविष्टियों को दुरुस्त कराने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
इस विवाद का वास्तविक आकलन अंतिम मतदाता सूची, आयोग की आधिकारिक जानकारी और संबंधित दावों की जांच के आधार पर ही किया जा सकेगा।
आगे क्या होगा?
10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन और उसके दौरान प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। इस बीच, मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े विवाद का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया, आधिकारिक आंकड़ों और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा से जुड़ा है।
दैनिक भारतवर्ष की नजर में
इस मामले में प्रदर्शन की वास्तविक स्थिति, प्रशासन के आधिकारिक बयान, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सत्यापित आंकड़ों पर आगे भी नजर रखी जानी चाहिए।
















