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देश की ‘टॉप गन’ बनी बिहार की भावना कंठ: बेगूसराय में पढ़ाई से फाइटर जेट तक का सफर, पहली महिला Fighter Combat Leader बनने का रचा इतिहास

भावना कंठ बनीं देश की पहली महिला ‘टॉप गन’, बेगूसराय से IAF तक का पूरा सफर

न्यूज़ डेस्क : दिल्ली | दैनिक भारतवर्ष

नई दिल्ली/बेगूसराय: भारतीय वायुसेना में बिहार की बेटी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उन्होंने वायुसेना के बेहद प्रतिष्ठित और कठिन Fighter Combat Leader (FCL) Course को सफलतापूर्वक पूरा कर देश की पहली महिला ‘टॉप गन’ का दर्जा हासिल किया है। यह प्रशिक्षण वायुसेना के Tactics and Air Combat Development Establishment (TACDE), ग्वालियर में होता है और इसमें लड़ाकू पायलटों को जटिल हवाई युद्ध अभियानों तथा एयर-कॉम्बैट रणनीति की उन्नत ट्रेनिंग दी जाती है।

भावना कंठ की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह भारतीय वायुसेना में फाइटर स्ट्रीम में शामिल होने वाली पहली तीन महिला पायलटों में रही हैं। 2016 में अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ उन्होंने लड़ाकू पायलट के रूप में नई शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार कठिन प्रशिक्षण और परिचालन उपलब्धियों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई।

बेगूसराय की बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप में बीता बचपन

भावना कंठ मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले के बाऊर गांव से जुड़ी हैं, लेकिन उनका जन्म और बचपन बेगूसराय की बरौनी रिफाइनरी टाउनशिप में बीता। उनके पिता तेज नारायण कंठ इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में इंजीनियर रहे हैं और उनकी मां गृहिणी हैं। भावना की शुरुआती शिक्षा बरौनी रिफाइनरी DAV पब्लिक स्कूल से हुई।

यानी जिस लड़की ने बेगूसराय में रहते हुए आसमान में उड़ते विमानों को देखा और उड़ान का सपना संजोया, वही आगे चलकर भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन फाइटर प्रशिक्षणों में शामिल होने वाली पायलट बनी।

मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग, फिर वायुसेना की राह

स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद भावना ने बेंगलुरु के BMS College of Engineering से B.E. (Medical Electronics) की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में भी काम किया, लेकिन उनका झुकाव लगातार वायुसेना की ओर बना रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने वायुसेना में चयन के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षा के रास्ते को अपनाया और अंततः फाइटर स्ट्रीम तक पहुंचीं।

भावना ने पहले भी बताया था कि बचपन से ही उनका सपना ‘आजाद पंछी की तरह उड़ने’ का था। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें फाइटर स्ट्रीम चुनने का अवसर मिला और उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण रास्ते को स्वीकार किया।

मामा की बात: फाइटर जेट से प्रेरित थीं भावना

भावना की कहानी में परिवार और आसपास के माहौल की भी अहम भूमिका रही। उनके परिवार की ओर से सामने आई जानकारी में यह बात कही गई है कि फाइटर जेट और उड़ान को लेकर भावना के मन में बचपन से ही खास आकर्षण था।

उनके परिवार के अनुसार, उड़ते लड़ाकू विमानों को देखकर उनके भीतर पायलट बनने की इच्छा मजबूत हुई। यही रुचि आगे चलकर करियर के फैसले में बदली और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बावजूद उन्होंने वायुसेना की राह चुनी।

हालांकि, उपलब्ध पुरानी रिपोर्टों में भावना के पिता ने भी बताया था कि वह स्कूल के दिनों से ही उड़ान की बात किया करती थीं।

2016 में पहली महिला फाइटर पायलटों के बैच का हिस्सा बनीं

2015 में भारतीय वायुसेना ने महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद भावना कंठ, अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह शुरुआती महिला फाइटर पायलटों के रूप में सामने आईं। जून 2016 में तीनों को फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया।

यह उस दौर में बड़ा बदलाव था, क्योंकि इससे पहले भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के कॉकपिट में महिलाओं की स्थायी भूमिका नहीं थी।

MiG-21 Bison की पहली सोलो उड़ान ने बढ़ाया आत्मविश्वास

नवंबर 2017 में भावना ने फाइटर स्क्वॉड्रन ज्वाइन किया। इसके बाद मार्च 2018 में उन्होंने MiG-21 Bison की अकेले उड़ान भरकर एक और उपलब्धि हासिल की। वह ऐसा करने वाली भारत की दूसरी महिला फाइटर पायलट बनीं।

इसके अगले साल मई 2019 में उन्होंने MiG-21 Bison पर दिन में लड़ाकू अभियानों के लिए जरूरी Day Operational Syllabus पूरा किया। इसके साथ वह किसी फाइटर जेट पर दिन में कॉम्बैट मिशन के लिए योग्य होने वाली भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं।

अब ‘टॉप गन’ वाली नई उपलब्धि

अब अगस्त 2026 में भावना कंठ ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हासिल की है। उन्होंने TACDE में आयोजित प्रतिष्ठित Fighter Combat Leader Course पूरा किया है। यह कोर्स फाइटर पायलटों को उन्नत हवाई युद्ध, रणनीति और जटिल कॉम्बैट मिशन में नेतृत्व के लिए तैयार करता है।

इसी उपलब्धि के बाद उन्हें भारत की पहली महिला ‘Top Gun’ combat pilot के रूप में रिपोर्ट किया जा रहा है। ‘टॉप गन’ यहां किसी औपचारिक सैन्य पद का नाम नहीं, बल्कि बेहद उन्नत फाइटर-कॉम्बैट प्रशिक्षण हासिल करने वाले पायलट के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला लोकप्रिय संदर्भ है।

बेगूसराय से ग्वालियर तक पहुंची एक लंबी उड़ान

भावना कंठ की कहानी केवल एक सैन्य उपलब्धि की कहानी नहीं है। यह उस सफर को भी दिखाती है जिसमें बेगूसराय की रिफाइनरी टाउनशिप में पढ़ाई करने वाली एक लड़की ने इंजीनियरिंग की, कॉरपोरेट नौकरी की और फिर देश की रक्षा के लिए फाइटर पायलट बनने का कठिन रास्ता चुना।

MiG-21 की सोलो उड़ान से लेकर दिन के कॉम्बैट मिशन की योग्यता और अब Fighter Combat Leader Course तक उनका सफर लगातार कठिन प्रशिक्षण और पेशेवर उपलब्धियों से जुड़ा रहा है।

महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका का संकेत

भावना कंठ की उपलब्धि भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका की तस्वीर भी सामने रखती है। जिस फाइटर स्ट्रीम में कभी महिलाओं की मौजूदगी नहीं थी, उसी में अब महिला पायलट न केवल लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, बल्कि उन्नत कॉम्बैट प्रशिक्षण और नेतृत्व की भूमिकाओं तक भी पहुंच रही हैं।

भावना की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर रक्षा सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं।

बेगूसराय में पढ़ाई और बचपन से शुरू हुई भावना कंठ की उड़ान अब भारतीय वायुसेना के सबसे चुनौतीपूर्ण फाइटर-कॉम्बैट प्रशिक्षण तक पहुंच चुकी है। उनकी कहानी बताती है कि तकनीकी शिक्षा, अनुशासन और लगातार कठिन प्रशिक्षण के जरिए छोटे शहरों से निकला सपना भी देश की सुरक्षा के सबसे ऊंचे आसमान तक पहुंच सकता है।

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