भोजपुर के भरत तिवारी की मौत के मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 अगस्त को घोषणा की। सरकार के मुताबिक न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी दी जाएगी।
न्यूज़ डेस्क : पटना | दैनिक भारतवर्ष
भरत तिवारी मामले में बिहार सरकार का बड़ा ऐलान
पटना/भोजपुर: भोजपुर के भरत भूषण तिवारी की मौत से जुड़े मामले में बिहार सरकार ने उनके परिवार के लिए आर्थिक सहायता और रोजगार से जुड़ी बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 13 अगस्त 2026 को कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से दी। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल आर्थिक सहायता के तौर पर दी जाने वाली राशि कितनी होगी, इसका खुलासा नहीं किया गया है।
17 जून को भोजपुर में हुई थी भरत तिवारी की मौत
भरत तिवारी की मौत 17 जून 2026 को भोजपुर के बिलौती गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई थी। पुलिस का दावा था कि कार्रवाई के दौरान भरत की ओर से गोली चलाए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई की गई। वहीं, भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस के इस दावे पर सवाल उठाते हुए घटना को फर्जी एनकाउंटर बताया था।
घटना के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी और बिहार सरकार ने इसकी न्यायिक जांच कराने का फैसला लिया। जांच के दौरान परिजनों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए तथा उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की भी जांच की गई।

न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट बनी फैसले का आधार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मुताबिक, सरकार का ताजा फैसला न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि जांच की अंतिम तस्वीर अभी सामने आना बाकी है।
सरकार ने फिलहाल दो स्तर पर सहायता की घोषणा की है—
पहला, भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता और
दूसरा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
सहायता की निर्धारित राशि तथा नौकरी से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
मामले में एक STF जवान की गिरफ्तारी
भरत तिवारी मामले की जांच के दौरान STF के जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी भी हुई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, घटना में शामिल अन्य पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की गई है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी या प्रशासनिक कार्रवाई को मामले में अंतिम दोष सिद्धि नहीं माना जा सकता। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिवार ने कहा- आर्थिक मदद से ज्यादा जरूरी न्याय
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि परिवार की प्राथमिक मांग न्याय है। उनका कहना है कि भरत की मौत के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार ने मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है।
इससे साफ है कि सरकार की आर्थिक सहायता और नौकरी की घोषणा के बावजूद परिवार की ओर से मामले की कानूनी जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई को महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।
अब आगे क्या होगा?
सरकार की घोषणा के बाद अब आर्थिक सहायता की राशि, सरकारी नौकरी के लिए पात्र परिजन और नियुक्ति की प्रक्रिया जैसे बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। साथ ही, न्यायिक जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद मामले की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
भरत तिवारी मामले में सरकार की ताजा घोषणा परिवार के लिए तत्काल राहत का कदम है, लेकिन घटना की पूरी कानूनी जिम्मेदारी और दोष तय होना जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम परिणाम पर निर्भर करेगा।
दैनिक भारतवर्ष का दृष्टिकोण: सरकार ने परिवार को आर्थिक सहायता और एक परिजन को सरकारी नौकरी देने की घोषणा कर दी है, लेकिन आर्थिक सहायता की राशि और नियुक्ति की विस्तृत प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है। दूसरी ओर, परिवार न्याय और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग पर कायम है।















