गायघाट और गिजवाही के दो ब्लॉकों से शुरू होगी प्रक्रिया, करीब 31 एकड़ क्षेत्र की बंदोबस्ती; खनन शुरू होने पर रोजगार और स्थानीय कारोबार को मिल सकती है गति
न्यूज़ डेस्क : रोहतास | दैनिक भारतवर्ष
सासाराम: रोहतास जिले में वर्षों से बंद पड़े पत्थर खनन उद्योग को फिर से शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। करवंदिया पहाड़ी के गायघाट और गिजवाही वन क्षेत्र के दो खनन ब्लॉकों की बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार दोनों ब्लॉकों को मिलाकर करीब 31 एकड़ क्षेत्र में खनन की तैयारी है।
डेढ़ दशक से बंद था पत्थर खनन
करवंदिया पहाड़ी क्षेत्र में पत्थर खनन लंबे समय से बंद है। पूर्व में यहां खनन और उससे जुड़े क्रशर उद्योग के कारण बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता था। जून 2012 में खनन गतिविधियां बंद होने के बाद इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा था।
अब सरकार और जिला प्रशासन की प्रक्रिया आगे बढ़ने से खनन उद्योग के दोबारा शुरू होने की संभावना बनी है।
24 करोड़ रुपये से शुरू होगी निविदा प्रक्रिया
28 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार गायघाट और गिजवाही वन के दोनों ब्लॉकों की बंदोबस्ती के लिए करीब 24 करोड़ रुपये से निविदा प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई थी। दोनों ब्लॉक लगभग साढ़े छह-साढ़े छह हेक्टेयर क्षेत्र में बताए गए हैं। प्रशासन की ओर से निविदा प्रकाशन के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था।
बंदोबस्ती प्रक्रिया पूरी होने और निर्धारित प्रशासनिक एवं वैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही वास्तविक खनन कार्य शुरू किया जा सकेगा।
पहले दो ब्लॉकों में शुरू होगा काम
खनन विभाग के अनुसार शुरुआती चरण में गायघाट और गिजवाही मौजा के एक-एक ब्लॉक में खनन शुरू करने की योजना है। सितंबर में जारी जानकारी के मुताबिक इन दोनों क्षेत्रों में लगभग 13 हेक्टेयर यानी 31.272 एकड़ क्षेत्र में खनन की तैयारी बताई गई थी।
जिला खनन पदाधिकारी के हवाले से यह भी बताया गया था कि इन दोनों क्षेत्रों में खनन कार्य शुरू करने का लक्ष्य आगामी महीनों में रखा गया है। हालांकि वास्तविक शुरुआत निविदा, बंदोबस्ती और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी।
रोजगार के साथ स्थानीय कारोबार को भी उम्मीद
खनन गतिविधि दोबारा शुरू होने से केवल खदानों में काम करने वाले मजदूरों को ही रोजगार मिलने की संभावना नहीं है, बल्कि क्रशर, परिवहन, मशीन संचालन, निर्माण सामग्री की ढुलाई और स्थानीय व्यापार से जुड़े लोगों को भी काम मिल सकता है।
खनन बंद होने के बाद प्रभावित रहे आसपास के बाजारों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का वास्तविक स्तर खनन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्रशर संचालन के लिए भी नियम तय
नई व्यवस्था में खदान की बंदोबस्ती पाने वाले व्यक्ति या संस्था को ही संबंधित नियमों के तहत क्रशर संचालन की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई है। सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार खनन क्षेत्र से निर्धारित दूरी के भीतर क्रशर संचालन की व्यवस्था रखी गई है।
इसका उद्देश्य खनन और क्रशर गतिविधियों को निर्धारित नियमों के दायरे में रखना है।
आगे दो और ब्लॉकों पर भी नजर
गायघाट और गिजवाही के बाद करवंदिया तथा गिजवाही ब्लॉक-2 में भी खनन शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी दी गई है। इन क्षेत्रों से संबंधित वन विभाग की स्वीकृतियों को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई है।
वन क्षेत्र से जुड़ी मंजूरियां भी महत्वपूर्ण
पत्थर खनन की प्रक्रिया में वन क्षेत्र से जुड़े भूखंड होने के कारण पर्यावरण एवं वन संबंधी अनुमतियां महत्वपूर्ण हैं। बिहार खान एवं भूतत्व विभाग के नोटिस बोर्ड पर रोहतास एवं नवादा के चिन्हित पत्थर भूखंडों की ई-नीलामी के लिए वन भूमि से गैर-वनीकरण उपयोग और अन्य कार्यों के लिए कंसल्टेंट एजेंसी के चयन संबंधी सूचना भी दर्ज है।
इसलिए खनन की शुरुआत केवल बंदोबस्ती से नहीं, बल्कि सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद होगी।
रोहतास में पत्थर उद्योग की वापसी की तैयारी
करवंदिया पहाड़ी में पत्थर खनन की बंदोबस्ती प्रक्रिया शुरू होना रोहतास के खनन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम है। फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव यह है कि वर्षों से बंद पड़े क्षेत्र में दो चिन्हित ब्लॉकों को लेकर बंदोबस्ती की प्रक्रिया वास्तविक रूप से आगे बढ़ चुकी है। आगे निविदा, सफल बंदोबस्तधारी का चयन और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद खनन शुरू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।















